INR News: रुपये में 7 महीनों की सबसे बड़ी तेजी, बाजार में चर्चा का विषय

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USD vs INR: नई दिल्ली। पिछले कारोबारी सत्र में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 91 के स्तर से नीचे फिसलने के बाद भारतीय रुपया बुधवार, 17 दिसंबर को तेज़ी से संभलता दिखाई दिया। बाजार में यह चर्चा रही कि मुद्रा को सहारा देने के लिए केंद्रीय बैंक ने बड़े पैमाने पर डॉलर की बिक्री की, जिससे रुपये को मजबूती मिली। INR News

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, रुपया दिन के कारोबार में लगभग एक प्रतिशत तक चढ़ा, जो 23 मई के बाद की सबसे बड़ी एकदिनी बढ़त मानी जा रही है। कारोबार के दौरान रुपया 90.0963 के स्तर तक पहुंच गया।

करूर वैश्य बैंक के ट्रेज़री प्रमुख वीआरसी रेड्डी ने बताया कि 91 के आसपास पहुंचने के बाद रुपया जरूरत से ज्यादा कमजोर दिखने लगा था। उनका कहना है कि दिसंबर महीने में अब तक विदेशी मुद्रा प्रबंधन को लेकर केंद्रीय बैंक का रुख अपेक्षाकृत नरम रहा था, लेकिन 91 के स्तर के पास उसने डॉलर बेचकर हस्तक्षेप किया।

रुपये को सहारा देने उतरा RBI | INR News

भारतीय रिज़र्व बैंक की यह कार्रवाई ऐसे समय पर सामने आई है, जब बीते कुछ हफ्तों में रुपया रिकॉर्ड निचले स्तरों तक पहुंच गया था। इससे यह सवाल उठने लगे थे कि गिरावट को थामने के लिए केंद्रीय बैंक पहले हस्तक्षेप क्यों नहीं कर रहा है। बाजार सहभागियों का मानना है कि मंगलवार को फॉरेन एक्सचेंज स्वैप के ज़रिये 5 अरब डॉलर की खरीद के बाद RBI ने खुले बाजार में भी कदम उठाया।

रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, बुधवार का हस्तक्षेप अक्टूबर और नवंबर में की गई कार्रवाइयों से मिलता-जुलता रहा, जब RBI ने रुपये में लगातार एकतरफा गिरावट को रोकने के लिए तीन बार सख्त हस्तक्षेप किया था। हर मौके पर केंद्रीय बैंक ने स्पॉट बाजार और नॉन-डिलीवेरेबल फॉरवर्ड (NDF) दोनों में बड़ी मात्रा में डॉलर बेचे, जिससे दिन के कारोबार के दौरान रुपये में तेज़ पलटाव देखने को मिला।

इससे एक दिन पहले ही रॉयटर्स ने बताया था कि बैंकरों ने केंद्रीय बैंक के आक्रामक हस्तक्षेप दोहराए जाने की आशंका को लेकर चेतावनी देनी शुरू कर दी थी। ब्लूमबर्ग ने फिनरेक्स ट्रेज़री एडवाइजर्स के ट्रेज़री प्रमुख अनिल कुमार भंसाली के हवाले से कहा कि केंद्रीय बैंक की इस कार्रवाई से फिलहाल सट्टेबाज़ी पर आधारित पोज़ीशन कमजोर पड़ सकती हैं।

दिसंबर में अब भी दबाव में रुपया | INR News

हालिया मजबूती के बावजूद, दिसंबर महीने में रुपया अब तक करीब दो प्रतिशत टूट चुका है। लगातार विदेशी पूंजी निकासी और भारत–अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर अनिश्चितता ने निवेशकों की धारणा को कमजोर किया है। इस गिरावट के चलते रुपया एशिया की प्रमुख मुद्राओं में सबसे कमजोर प्रदर्शन करने वाली मुद्रा बन गया था। वैश्विक निवेशकों ने इस वर्ष भारतीय शेयर बाजार से लगभग 18 अरब डॉलर की निकासी की है, जिससे रुपये पर अतिरिक्त दबाव पड़ा।

इसके अलावा, अमेरिका द्वारा लगाए गए 50 प्रतिशत तक के शुल्क निर्यातकों से मिलने वाले डॉलर प्रवाह के लिए जोखिम बने हुए हैं। वहीं, मजबूत आयात मांग के कारण डॉलर की जरूरत ऊंची बनी हुई है, जिसने रुपये की चाल को और चुनौतीपूर्ण बना दिया है। INR News

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