कण्डेला में प्रदूषण के खिलाफ जनाक्रोश, धरने पर बैठे ग्रामीण
प्रदूषण से कई गांवों में फैल रही गम्भीर बीमारियां, समस्या का समाधान होने तक धरने पर डटे रहेंगे ग्रामीण
कैराना, सच कहूँ न्यूज़। Kairana News: कैराना ब्लॉक क्षेत्र के गांव कण्डेला के औद्योगिक क्षेत्र में संचालित फैक्ट्रियों से फैल रहे प्रदूषण पर ग्रामीणों का आक्रोश फूट पड़ा है। आक्रोशित ग्रामीण प्रदूषण के खिलाफ अनिश्चितकाल के लिए धरने पर बैठ गए है। ग्रामीणों के धरने पर बैठने से फैक्ट्री संचालकों एवं पुलिस-प्रशासन में हड़कंप मचा है।मंगलवार को शामली-कैराना मार्ग पर स्थित गांव कण्डेला के बस स्टॉप के निकट राहुल चौहान, अमरीश कोरी, अमित चौहान, चरणसिंह चौहान, वैसर प्रधान, गुरदीप चौहान, कुलदीप राणा, अंकित चौहान, रूपेश चौहान, गौरव, नितिन, प्रवीण, कान्हा, सागर, बादल, आजाद, अंकुर आदि ग्रामीण दरा बिछाकर धरने पर बैठ गए है।
आरोप है कि औद्योगिक क्षेत्र में संचालित कई फैक्ट्रियों से फैल रहे वायु एवं भू-जल प्रदूषण से लोगो का जीना मुहाल हो गया है। औद्योगिक क्षेत्र के दायरे में स्थित कण्डेला, हिंगोखेड़ी, शेखूपुरा, जगनपुर, भूरा, मन्नामाज़रा, ऐरटी, बलवा गुजरान आदि गांवों में फैक्ट्रियों से निकलने वाले इस प्रदूषण से दमा, अस्थमा, कैंसर, पथरी, काला पीलिया आदि बीमारियां तेजी से फैल रही है। अनेकों ग्रामीण इन बीमारियों की चपेट में आकर असमय काल के गाल में समा चुके है। धरने पर बैठे ग्रामीणों का कहना है कि वह इस समस्या के समाधान हेतु फैक्ट्री संचालकों से वार्ता करने के अलावा जिले के शीर्ष अधिकारियों को भी पत्र दे चुके है। प्रदूषण विभाग के स्थानीय कार्यालय से लेकर लखनऊ दफ्तर तक पत्र भेजकर शिकायत की जा चुकी है, परन्तु परिणाम हमेशा ढाक के वहीं तीन पात रहा है।
जांच के लिए आने वाली टीम फैक्ट्री संचालकों को 'क्लीन चिट' देकर लौट जाती है। जांच का दायरा धरातलीय न होकर 'औपचारिता' तक सीमित रह गया है। ग्रामीणों का कहना है कि प्रदूषण पर अंकुश न लगाए जाने से आहत होकर उन्हें धरना-प्रदर्शन के लिए विवश होना पड़ा है। साथ ही, ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि समस्या के समाधान होने तक धरना-प्रदर्शन किसी भी सूरत में समाप्त नही किया जाएगा। स्वच्छ हवा और पानी संविधान प्रदत्त अधिकार है, जिसकी रक्षा करना उनका अधिकार है। वहीं, सदर कोतवाली प्रभारी निरीक्षक मुकेश कुमार ने बताया कि धरने पर बैठे ग्रामीणों से वार्ता के लिए पुलिस टीम मौके पर पहुंची थी। ग्रामीणों से एक सप्ताह के अंदर समस्या के समाधान का आश्वासन दिया गया था, परन्तु अभी वार्ता किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंची है।