मोतियों की खेती कर लाखों कमा रहे दो दोस्त

Pearls-Farming

10 हजार की नौकरी करने वाले दोस्तों ने पहले ही वर्ष लिया 4 लाख का मुनाफा

सच कहूँ, देवीलाल बारना
कुरुक्षेत्र। कहते हैं कि मन में कुछ करने की ललक हो तो कुछ भी काम मुश्किल नहीं रहता। ऐसा ही कुछ कर दिखाया है, धर्मनगरी के गांव बुहावी के दो दोस्त सुरेंद्र व राजेश ने। दोनों दोस्त एक फैक्ट्री में कार्य कर लगभग 10-10 हजार रूपए कमा कर अपने परिवार का पेट पाल रहे थे। एक दिन दोनों दोस्त कुछ नया करने की ललक के साथ विडियो देख रहे थे। एक वीडियो ने दो दोस्तों की जिंदगी इस कदर बदल दी कि दोनों घर में अपने दम पर मोती की खेती कर सालाना लाखों रुपये कमाने के साथ-साथ मोती बेच नाम भी कमा रहे हैं। अब दोनों दोस्तों के मोतियों की धमक देश ही नहीं विदेशों तक पहुंच रही है। सुरेंद्र व राजेश ने विडियो में मोती की खेती के बारे में देखा था और विडियो देखकर दोनों दोस्तों ने मोतियों की खेती का कार्य शुरू कर दिया।

Pearls-Farming-1

12 महीने की खेती में चार लाख का मुनाफा

सुरेंद्र व राजेश ने कहा कि लगभग 12 महीने की खेती के बाद दोनों पार्टनरों को लगभग चार-लाख का मुनाफा हुआ। अब दोनों ने घर में बनाये टेंक की क्षमता को बढ़ा दिया है। साथ ही अब अंडमान-निकोबार में दो फार्म बनाए हुए हैं, जहां से वह गोल मोतियों की खेती करते हैं। राजेश ने बताया कि सीप की सर्जरी उस वक्त की जाती है, जब वह मुंह खोलती है और उसके अंदर एक सांचा डाल दिया जाता है। जिससे मोती उस सांचे के आकार का निकलता है। पानी में टीडीएस की मात्रा 400 से 500 के बीच होनी चाहिए। लगभग 3 से 4 महीने के बाद टैंक का पानी बदल दिया जाता है और 12 से 13 महीने के बाद इसमें मोती तैयार हो जाता है।

पर्ल कल्चर का प्रचलन हरियाणा में काफी कम

मत्स्य विभाग के उप निदेशक आत्माराम बताते हैं कि हरियाणा में पर्ल कल्चर का प्रचलन तो है लेकिन बहुत कम है। कुरुक्षेत्र के अलावा झज्जर में कुछ गिने-चुने लोग ही इसे कर रहे हैं। अगर वातावरण की बात करें तो हरियाणा का वातावरण 8 से 9 महीने पर्ल के लिए सही साबित होता है क्योंकि इसके लिए 25 से 35 डिग्री तापमान अनुकूल रहता है। आत्माराम का कहना है कि अगर किसानों का रूझान इस तरफ बड़े तो वह इससे अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं।

अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें Facebook और TwitterInstagramLinkedIn , YouTube  पर फॉलो करें।