Bank Fraud Case: जैलानी स्टील ट्रेडर्स बैंक फ्रॉड केस में 7 दोषी, मुख्य आरोपी को 2 साल की सजा
बैंक फ्रॉड मामले में सीबीआई कोर्ट का बड़ा फैसला, प्राइवेट फर्म समेत 7 दोषियों को सजा
नई दिल्ली (एजेंसी)। Bank Fraud Case: चेन्नई की सीबीआई कोर्ट ने बैंक धोखाधड़ी के मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने 31 अगस्त को एक प्राइवेट फर्म मेसर्स जैलानी स्टील ट्रेडर्स समेत 7 लोगों को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने यह केस 21 अप्रैल 2008 को यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया की शिकायत पर दर्ज किया था।
दोषी ठहराए गए लोगों में एस. अमरुद्दीन, एल. विजयलक्ष्मी, एम. शांति, एस. कामाक्षी, एम. शिवकुमार और एम. रविचंद्रन बाबू शामिल हैं।
आरोप था कि मेसर्स जैलानी स्टील ट्रेडर्स और अन्य लोगों ने बैंक ऑफ इंडिया के अधिकारियों के साथ मिलकर साजिश रची थी। उन्होंने फर्जी दस्तावेज जमा करके बैंक से कई तरह की क्रेडिट सुविधाएं लीं, बैंक के पैसों का गबन किया और करीब 2.68 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी की।
जांच पूरी होने के बाद सीबीआई ने 23 जून 2009 को मेसर्स जैलानी स्टील ट्रेडर्स और 13 अन्य आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। लंबे ट्रायल के बाद कोर्ट ने 31 अगस्त 2026 को 7 आरोपियों को दोषी ठहराया।
कोर्ट ने प्राइवेट फर्म मेसर्स जैलानी स्टील ट्रेडर्स पर 20,000 रुपए का जुर्माना लगाया है। आरोपी एस. अमरुद्दीन को 2 साल की सश्रम कारावास की सजा सुनाई गई है, जबकि एल. विजयलक्ष्मी, एम. शांति, एस. कामाक्षी, एम. शिवकुमार और एम. रविचंद्रन बाबू को 6 महीने की सश्रम कारावास की सजा दी गई है। इन 6 आरोपियों पर कुल 60,000 रुपए का जुर्माना भी लगाया गया है।
इस मामले में 4 प्राइवेट आरोपी (जैलानी बीवी, ए. श्रीनिवासन, एन. मनोहरण और एस. जी. शेखर) की ट्रायल के दौरान मौत हो गई थी, इसलिए उनके खिलाफ आरोप समाप्त कर दिए गए। वहीं, लोक सेवक एस.आर. ज्ञानशेखर, ब्रांच मैनेजर, यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया और प्राइवेट व्यक्ति एम. चक्रवर्ती को बरी कर दिया गया, जबकि लोक सेवक पी.बी. संपत कुमार, पैनल एडवोकेट, यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया को आरोपमुक्त कर दिया गया।