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Sunday, March 1, 2026
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    UP Metro News: उत्तर प्रदेश के इस जिले से होकर गुजरेगी मेट्रो, आसमान छुएंगे जमीनों के दाम

    UP Metro News
    UP Metro News: उत्तर प्रदेश के इस जिले से होकर गुजरेगी मेट्रो, आसमान छुएंगे जमीनों के दाम

    UP Metro News: मेरठ, रविन्द्र सिंह। अगर आप उत्तर प्रदेश के मेरठ के निवासी हैं तो आपके लिए खुशी की खबर हैं दरअसल आरटीएस के अंतर्गत मेरठ में तीन अंडरग्राउंड स्टेशन बनाकर तैयार किये जा रहे हैं इनमें मेरठ सेंट्रल, मेरठ भैंसाली और बेगमपुर शामिल हैं। इन स्टेशनों में बेगमपुर स्टेशन पर नमों भारत और मैट्रों दोनों सेवा दी जाएगी, जबकि मेरठ भैंसाली और मेरठ सेंट्रल स्टेशन पर केवल मैट्रों की ही सुविधा दी जाएगी। एनसीआरटी ने जानकारी दी हैं कि मेरठ में दिल्ली सड़क पर ब्रह्मपुरी मैट्रो स्टेशन रामलीला मैदान से बेगमपुल स्टेशन से टेक चौराहे तक भुमि के अदर सुरंग बनाई गई हैं मेरठ का अंडरग्राउंड सेक्शन एलिवेटेड वायडक्ट के रैंप से दोनो और से जोड़ा जाएगा। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि दिल्ली से नमों भारत ट्रेन मेरठ तक चल चुकी है।

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    नई तकनीक का हो रहा हैं उपयोग | UP Metro News

    आपकी जानकारी के लिए बता दे कि मेरठ सेंट्रल, मेरठ भैंसाली और बेगमपुर स्टेशनों का ट्रैक बिछाने के लिए नई तकनीक का उपयोग किया जा रहा हैं। इन ट्रैक की खास बात यह हैं कि इन ट्रैको को कम रख रखाव की आवश्यकता होती हैं जिस कारण इन ट्रैको के रख रखाव में आने वाला खर्चा भी कम होगा। आपकी जानकारी के लिए बता दे कि इन ट्रैकों के निर्माण में अच्छी गुणवत्ता वाले कंक्रीट का उपयोग किया जा रहा हैं।

    मास स्प्रिंग सिस्टम का भी होगा इस्तेमाल

    बता दे कि इन ट्रैको को बनाने में मास स्प्रिंग सिस्टम का इस्तेमाल किया जा रहा हैं। मास स्प्रिंग सिस्टम का इस्तेमाल तेज रफतार से चलने वाली ट्रेनों के चलने से होने वाले बायब्रेशन को कम करने के लिए किया जाता हैं बायब्रेशन को कम करने के लिए ट्रैक स्लैब बनाने से पहले टनल की सतह पर कंक्रीट की परत बिछाई जाती हैं।

    कब तक चलेगी मेट्रो

    आपकी जानकारी के लिए बता दें कि मेरठ मेट्रो की समय सीमा जून 2025 है, लेकिन एनसीआरटीसी को मार्च 2025 तक इसे पूरा करने की उम्मीद है। मेरठ मेट्रो में 13 स्टेशन होंगे, जिनमें 3 भूमिगत और 10 एलिवेटेड स्टेशन होंगे। मेरठ मेट्रो के कॉरिडोर को बनाने के लिए प्रीकास्ट तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। इस तकनीक की मदद से स्टेशनों और वायाडक्ट के निर्माण का काम तेजी से किया जा रहा है।

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