चीन-ताइवान की जंग! विश्व युद्ध का बजा सायरन! भारत लेगा बड़ा फैसला

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नई दिल्ली (एजेंसी)। चीन-ताइवान की कभी भी जंग हो सकती है। उधर ताइवान चीन के सैन्य अभ्यासों के बीच अपने सहयोगियों के साथ निकट संपर्क में है साथ ही संभावित तनाव को रोकने के लिए अपनी युद्ध तैयारियों को भी बढ़ा रहा है। ईबीसी समाचार चैनल ने ताइवान की नेता त्साई इंग-वेन के एक वीडियो संदेश के हवाले से कहा कि ताइवान सशस्त्र बलों ने युद्ध की तैयारी में वृद्धि की है और वे द्वीप के आसपास सैन्य स्थिति को कड़ाई से और समयबद्ध तरीके से नियंत्रित कर रहे है। हम संयुक्त रूप से तनाव को बढ़ने से रोकने के लिए अपने सहयोगियों के साथ भी निकट संपर्क में हैं। वहीं भारत भी इस नजर बनाए हुए हैं। रूस और पाकिस्तान ने चीन का समर्थन किया है। अब देखना दिलचस्प होगा भारत किसका साथ देता है।

नैन्सी पेलोसी की द्वीप की यात्रा से हुआ विवाद

त्साई इंग-वेन ने यह भी कहा कि ताइवान अपनी संप्रभुता और सुरक्षा की रक्षा के लिए दृढ़ संकल्पित है और द्वीप के अधिकारी आर्थिक स्थिरता बनाए रखने और सुरक्षित और मुक्त समुद्री मार्गों के साथ-साथ हवाई अड्डों के सामान्य संचालन को सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयास करेंगे।

इससे पहले दिन में चीन ने अमेरिकी संसद अध्यक्ष नैन्सी पेलोसी की द्वीप की यात्रा के जवाब में ताइवान के पास छह जल क्षेत्रों और हवाई क्षेत्र में बड़े पैमाने पर सैन्य अभ्यास शुरू किया। अभ्यास रविवार को दोपहर 12 बजे तक चलेगा। पेलोसी द्वारा बीजिंग की चेतावनियों को नजरअंदाज करने और एशिया दौरे के दौरान ताइपे जाने की अपनी योजना के साथ आगे बढ़ने के बाद इस सप्ताह चीन और द्वीप के बीच तनाव का बढ़ गया था। वह 14 वर्षों में ताइवान की यात्रा करने वाली सर्वोच्च रैंकिंग वाली अमेरिकी अधिकारी हैं। संयुक्त राज्य अमेरिका ताइवान की स्वतंत्रता को आधिकारिक रूप से मान्यता नहीं देता है।

क्या है मामला:

वन-चाइना पॉलिसी के तहत चीन ने कहा कि ताइवान चीन का ही हिस्सा है लेकिन ताइवान खुद को आजाद देश मानता है। ताइवान के पास खुद की सेना है, खुद का संविधान और अपनी अलग सरकार है। ताइवान के आस-पास चीन अपना जाल बिछा रहा है और हर हाल में कब्जा करना चाहता है लेकिन ताइवान हार मानने के लिए तैयार नहीं हैं। इधर, अमेका भी वन चाइना पॉलिसी को मानता है, लेकिन ताइवान पर चीन का कब्जा रोकना चाहता है। अमेरिकी राष्टÑपति ने 2 महीने पहले कहा था कि हम वन चाइना पॉलिसी पर राजी हुए लेकिन ताइवान को बल के प्रयोग से छीना जा सकता है।

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