मदरसों में 'वंदे मातरम' अनिवार्य! हुमायूं कबीर ने किया विरोध

पश्चिम बंगाल के सरकारी आदेश पर ऑल इंडिया जमीयत-उल-उलेमा के अध्यक्ष ने की अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त

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Vande Mataram Mandatory in Madrasas: कोलकाता। पश्चिम बंगाल के मदरसों में ‘वंदे मातरम’ को अनिवार्य किए जाने के सरकारी आदेश पर ऑल इंडिया जमीयत-उल-उलेमा (एजेयूपी) के अध्यक्ष हुमायूं कबीर ने अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि संविधान देश के प्रत्येक नागरिक को अपने धर्म और आस्था के अनुसार जीवन जीने का अधिकार देता है। ऐसे में किसी समुदाय पर उसकी धार्मिक मान्यताओं से अलग सांस्कृतिक परंपराएं थोपना उचित नहीं माना जा सकता। West Bengal News

हुमायूं कबीर ने कहा कि मदरसे शिक्षा के केंद्र हैं, जहां धार्मिक और नैतिक मूल्यों की पढ़ाई कराई जाती है। उनका कहना था कि मुस्लिम समुदाय अपनी धार्मिक मान्यताओं और पवित्र कुरान के संरक्षण को महत्वपूर्ण मानता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि सरकार का कोई निर्णय समुदाय की भावनाओं के विपरीत जाता है, तो उसके खिलाफ लोकतांत्रिक तरीके से आवाज उठाई जाएगी।

उन्होंने यह भी कहा कि संविधान की शपथ लेने वाले जनप्रतिनिधियों को सभी वर्गों और समुदायों की भावनाओं का सम्मान करना चाहिए। उनका कहना था कि किसी भी समाज पर अनावश्यक दबाव या कठोरता नहीं होनी चाहिए और प्रशासन को संविधान के दायरे में रहकर काम करना चाहिए। हुमायूं कबीर ने कहा कि यदि किसी समुदाय के अधिकारों या धार्मिक स्वतंत्रता पर असर पड़ता है, तो वे इसका विरोध करेंगे।

उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में अपनी बात रखने और विरोध दर्ज कराने का अधिकार सभी नागरिकों को प्राप्त है। गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल सरकार ने हाल ही में राज्य के सभी मदरसों में ‘वंदे मातरम’ गान को अनिवार्य करने का आदेश जारी किया है। सरकारी निर्देश के अनुसार यह नियम सरकारी मॉडल मदरसों, सरकारी सहायता प्राप्त और गैर-सहायता प्राप्त मदरसों पर तत्काल प्रभाव से लागू होगा। अब कक्षाएं शुरू होने से पहले सुबह की प्रार्थना सभा में ‘वंदे मातरम’ गाना अनिवार्य रहेगा। West Bengal News

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