US Iran War: अमेरिका-ईरान में फिर भड़की जंग की आग, लारक पर US का हमला तो जॉर्डन में अमेरिकी ठिकानों पर ईरान का पलटवार

US Iran War: अमेरिका-ईरान में फिर भड़की जंग की आग, लारक पर US का हमला तो जॉर्डन में अमेरिकी ठिकानों पर ईरान का पलटवार

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अमेरिका और ईरान के बीच महीनों से जारी तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। दोनों देशों के बीच कुछ समय से अपेक्षाकृत शांति बनी हुई थी, लेकिन रविवार को अमेरिका की सैन्य कार्रवाई और उसके बाद ईरान के जवाबी हमले ने पश्चिम एशिया में फिर से युद्ध का खतरा बढ़ा दिया है। अमेरिका ने ईरान के रणनीतिक लारक द्वीप पर दो रॉकेट लॉन्चरों को निशाना बनाया। इसके जवाब में ईरान ने जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने का दावा किया।

इस घटनाक्रम के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खार्ग द्वीप को लेकर भी बड़ा दावा किया है। ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth पर एक वीडियो साझा करते हुए कहा कि खार्ग द्वीप के पूरी तरह परखच्चे उड़ गए हैं। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है और रिपोर्टों के अनुसार ट्रंप द्वारा साझा किया गया वीडियो AI-generated प्रतीत होता है।

लारक द्वीप पर अमेरिका ने क्यों किया हमला?

अमेरिकी सेंट्रल कमांड के मुताबिक, ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC के जवान लारक द्वीप पर रॉकेट लॉन्चरों की मदद से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में समुद्री बारूदी सुरंगें बिछाने की तैयारी कर रहे थे। अमेरिका ने इसी खतरे को देखते हुए दो लॉन्चरों पर हमला किया।

अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। हाल ही में अमेरिकी सेना ने इस इलाके में मौजूद समुद्री बारूदी सुरंगों को हटाने की कार्रवाई की थी और अब वह इस मार्ग से जहाजों की आवाजाही को सुरक्षित रखने पर जोर दे रही है।

यह हमला इसलिए भी अहम है क्योंकि यह कई हफ्तों के अंतराल के बाद ईरानी क्षेत्र पर अमेरिका की पहली सार्वजनिक रूप से स्वीकार की गई सैन्य कार्रवाई है।

ईरान ने जॉर्डन में अमेरिकी ठिकानों को बनाया निशाना

अमेरिकी हमले के बाद ईरान की IRGC ने जवाबी कार्रवाई का दावा किया। ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के मुताबिक, उसकी मिसाइल और ड्रोन कार्रवाई में जॉर्डन स्थित किंग हुसैन और अल-अज्राक सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया।

ईरान का दावा है कि इन ठिकानों पर मौजूद अमेरिकी सैन्य ढांचे, तकनीकी और रखरखाव सुविधाओं तथा लड़ाकू विमानों से जुड़े स्थानों को निशाना बनाया गया। ईरान ने इस कार्रवाई को अमेरिका के हमले का जवाब बताते हुए आगे भी कड़ी प्रतिक्रिया की चेतावनी दी है।

हालांकि, जॉर्डन की सेना ने कहा कि उसके हवाई क्षेत्र में दाखिल हुईं आठ मिसाइलों को इंटरसेप्ट किया गया। इस वजह से ईरान के हमले से हुए वास्तविक नुकसान को लेकर दोनों पक्षों के दावों में अंतर है।

ट्रंप का खार्ग द्वीप को लेकर बड़ा दावा

इसी बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खार्ग द्वीप को लेकर सोशल मीडिया पर बड़ा दावा किया। उन्होंने एक वीडियो साझा करते हुए संकेत दिया कि ईरान के इस महत्वपूर्ण द्वीप पर भारी तबाही हुई है।

खार्ग द्वीप ईरान के लिए रणनीतिक और आर्थिक रूप से बेहद अहम है। यह देश के तेल निर्यात का प्रमुख केंद्र रहा है। रिपोर्टों के अनुसार, संघर्ष शुरू होने से पहले ईरान के तेल निर्यात का बड़ा हिस्सा इसी द्वीप से संचालित होता था।

लेकिन यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि खार्ग द्वीप के पूरी तरह तबाह होने की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। ट्रंप के पोस्ट में इस्तेमाल किया गया वीडियो AI-generated होने की बात सामने आई है। इसलिए इसे फिलहाल अमेरिकी राष्ट्रपति का दावा ही माना जा रहा है, न कि स्वतंत्र रूप से सत्यापित तथ्य।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर बढ़ा खतरा

अमेरिका और ईरान के बीच ताजा टकराव का सबसे बड़ा असर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर पड़ सकता है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है और यहां किसी भी तरह की सैन्य गतिविधि का असर अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर पड़ सकता है।

ताजा घटनाक्रम के बाद तेल की कीमतों में तेजी देखने को मिली है। बाजार को आशंका है कि अगर संघर्ष और बढ़ा तथा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई तो वैश्विक तेल आपूर्ति पर दबाव बढ़ सकता है।

क्या फिर बड़े युद्ध की ओर बढ़ रहे अमेरिका और ईरान?

अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष फरवरी 2026 में शुरू हुआ था और इसके बाद कई महीनों तक दोनों पक्षों के बीच हमले और जवाबी हमले जारी रहे। बाद में संघर्ष की तीव्रता कम हुई और राजनयिक स्तर पर समाधान की कोशिशें भी हुईं। लेकिन लारक द्वीप पर अमेरिकी हमला और उसके बाद जॉर्डन में अमेरिकी ठिकानों पर ईरान की जवाबी कार्रवाई ने साफ कर दिया है कि दोनों देशों के बीच तनाव अभी खत्म नहीं हुआ है।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह केवल सीमित सैन्य जवाबी कार्रवाई तक रहेगा या दोनों देशों के बीच संघर्ष एक बार फिर व्यापक युद्ध का रूप लेगा। आने वाले दिनों में अमेरिका की अगली सैन्य कार्रवाई और ईरान की प्रतिक्रिया पर पूरी दुनिया की नजर रहेगी।

दुनिया की नजर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर

अमेरिका-ईरान तनाव का असर सिर्फ पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में किसी भी बड़े व्यवधान का सीधा असर तेल, गैस, शिपिंग और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। ऐसे में लारक द्वीप पर हमला और जॉर्डन में अमेरिकी ठिकानों पर ईरान का पलटवार आने वाले दिनों के लिए बेहद महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।

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