‘उड़ान’-2 में हट सकती है एकाधिकार की व्यवस्था

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एक र्इंजन वाले हेलीकॉप्टरों को अनुमति नहीं

नई दिल्ली (एजेंसी)। सस्ती हवाई यात्रा वाली सरकार की क्षेत्रीय संपर्क योजना यानी ‘उड़ान’ (उड़े देश का आम नागरिक) के दूसरे चरण में एकाधिकार और न्यूनतम दूरी की व्यवस्था समाप्त करने के साथ कई बदलावों की संभावना है, लेकिन इसमें भी एक र्इंजन वाले हेलीकॉप्टरों को अनुमति मिलने की संभावना नहीं है।

वाणिज्यिक इस्तेमाल के लिए उड़ानें अटकी

सरकार इस महीने के अंत तक या अगले महीने की शुरुआत तक दूसरे चरण के लिए निविदा शर्तों को अंतिम रूप देकर बोली प्रक्रिया शुरू करेगी जबकि एक र्इंजन वाले हेलिकॉप्टरों का वाणिज्यिक उड़ानों के लिए इस्तेमाल का मामला कम से दो-तीन महीने के लिए अटक गया है। नागर विमानन मंत्रालय की एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि विमानों के मामले में न्यूनतम दूरी की सीमा हटाए जाने के विमान सेवा कंपनियों के अनुरोध को स्वीकार किया जा सकता है।

फिलहाल 151 किलोमीटर से 800 किलोमीटर की दूरी वाले रूट ही आरसीएस का हिस्सा है। न्यूनतम सीमा हटा देने से छोटी से छोटी दूरी वाले रूटों को भी शामिल किया जा सकेगा। अधिकारी ने कहा कि एकाधिकार की व्यवस्था भी समाप्त की जा सकती है। हालाँकि, वीजीएफ के रूप में दी जाने वाली क्षतिपूर्ति तथा अन्य लाभ सिर्फ उसी एयरलाइंस को दिए जाएंगे, जिसने बोली प्रक्रिया में रूट का आवंटन प्राप्त किया है। पहले चरण में रूटों का आवंटन प्राप्त करने वाली एयरलाइंसों को तीन साल का एकाधिकार दिया गया है।

अधिकारी ने बताया कि

एक इंजन वाले हेलिकॉप्टरों के बारे में उन्होंने बताया कि 07 जून को नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) के साथ हेलिकॉप्टर आॅपरेटरों की बैठक हुई थी। डीजीसीए संरक्षा कारणों से एक इंजन वाले हेलिकॉप्टरों के वाणिज्यिक उड़ानों में इस्तेमाल की अनुमति नहीं दे रहा है। वहीं, हेलिकॉप्टर आॅपरेटरों का कहना है कि ये पूरी तरह सुरक्षित हैं।

अधिकारी ने बताया कि हेलिकॉप्टर आॅपरेटर एक इंजन वाले हेलिकॉप्टरों के साथ क्षेत्रीय संपर्क योजना (आरसीएस) में आॅपरेशन शुरू करना चाहते हैं क्योंकि इन हेलिकॉप्टरों की तुलना में दो इंजन वाले हेलिकॉप्टरों की कीमत काफी ज्यादा होती है। उन्होंने कहा कि मंत्रालय ने डीजीसीए से इस मसले पर थोड़ा समय देने के लिए कहा है। मंत्रालय ने डीजीसीए को एक समिति बनाने का निर्देश दिया है, जिसके समक्ष हेलिकॉप्टर आॅपरेटर अपना पक्ष रखेंगे।

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