Financial : वित्तीय स्थिति में सुधार की उम्मीद

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Financial : जीएसटी संग्रहन में निरंतर वृद्धि दर्ज की जा रही है, जिसकी बदौलत केंद्र व राज्य स्तर पर आर्थिक स्थिति में भी सुधार हो रहा है। बैंकों की स्थिति मजबूत होना अति आवश्यक है। पंजाब सरकार भी पहली तिमाही में जीएसटी संग्रहण में 25 फीसदी वृद्धि की बात कर रही है, वहीं महाराष्ट्र, हरियाणा, छत्तीसगढ़ सहित अन्य राज्यों में भी यह वृद्धि दर्ज की गई है। यहां सबसे दिलचस्प बात यह है कि हरियाणा के जीएसटी संग्रहण में 40 प्रतिशत हिस्सेदारी केवल गुरुग्राम की है। जीएसटी में यह वृद्धि ऐसे वक्त में दर्ज की गई, जब हजारों फर्जी कंपनियों का खुलासा हो रहा है। यदि इस फर्जीवाड़े पर पूर्णत लगाम लग जाए तो देश की नुहार ही बदल सकती है। Financial

अब सरकारों के लिए जरूरी है कि वह कल्याणकारी नीतियों पर जोर दें ताकि विकास का लाभ आमजन तक पहुंच सके। कल्याणकारी नीतियों का अर्थ यह भी नहीं कि मुफ्त की रेवड़ियां बांटी जाएं। दरअसल, विकसित देशों की तर्ज पर ही कार्य शुरु करने की आवश्यकता है। यदि वरिष्ठ नागरिकों को उचित सुविधाएं मिलेंगी तो लोग कर चोरी की आदत छोड़ देंगे। जब व्यक्ति को यह भरोसा मिलेगा कि सरकार उन्हें ज्यादा से ज्यादा सुविधाएं उपलब्ध करवाएगी तब लोग टैक्स चोरी तथा अन्य गैर-कानूनी तरीकों से धन कमाने से गुरेज करेंगे, जिससे सरकार की आय में वृद्धि तो होगी, साथ ही देश का पैसा देश में ही खर्च होगा। Financial

यदि मनरेगा पर मोटा पैसा खर्च किया जाता है तो यह पैसा देश के बाजार में घूमता है और अर्थव्यवस्था के पहियों को गति देता है। सरकार की आय बढ़ाने का अपने आप में कोई उद्देश्य नहीं है, सरकार को पैसा जोड़ना नहीं है बल्कि पैसे से योजना बनानी होती है। यदि देश में योजनाबद्ध तरीके से कार्य हो तो आज हर साल विदेश भाग रहे करीब तीन लाख युवा देश में ही अवसर तलाशने लगेंगे और देश का पैसा भी देश में ही रहेगा। यदि युवा देश में ही कमाएंगे तो सरकारी खजाने में धन बढ़ेगा। दरअसल, यह योजना एक मजबूत प्रणाली का हिस्सा होना चाहिए न कि चुनावी रणनीति का हिस्सा।

सामान्य तौर पर यही होता रहा है कि चुनाव के समय मुफ्त कार्यक्रम शुरू किए जाते हैं, लेकिन प्रत्येक कल्याणकारी योजना मुफ्त का कोई पैंतरा नहीं होती है। कल्याणकारी योजना केवल चुनाव तक ही सीमित न रहे। इसमें कोई संदेह नहीं कि देश में धन, रोजगार प्रतिभा, उद्यमिता की कोई कमी नहीं है, कमी है तो केवल ईमानदारी, इच्छाशक्ति, जिम्मेदारी और राष्ट्रीय चरित्र की। देश में युवाओं के लिए अपार अवसर हैं और यदि सरकारों की नीति और नियत सही है तो सरकारों के पास भी संसाधनों की कोई कमी नहीं है।

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