भाजपा से बढ़कर मोदी को मिला बहुमत
विपक्ष की ईवीएम से लेकर राफाल, पुलवामा, जीएसटी, नोटबंदी, मॉबलिचिंग, असहिष्णुता जैसे आरोपों को दरकिनार कर भाजपा व सहयोगी दलों ने 2014 से भी बड़ी जीत दर्ज की है। भले ही कांग्रेस ने अपने 2014 के आंकड़ों में अच्छा सुधार किया है फिर भी वह लोगों की पसंद नहीं बन सकी। इस चुनाव ने साफ कर दिया है कि देश अब हिन्दु राष्ट होने की तरफ अग्रसर हो रहा है चूंकि देश यदि विकास या भ्रष्टाचार मिटाने की बात करता तब शायद भाजपा व इसके सहयोगी दलों को वापिस सत्ता नहीं सौंपता। विकास व भ्रष्टाचार पर यदि जमीनी सच्चाईयों की जांच-पड़ताल हो तब नरेन्द्र मोदी सरकार मनमोहन सिंह की सरकार से दो कदम पीछे ही रही है।
अब अगले पांच वर्ष देश को अनुमान करना है कि आज के पांच साल बाद भारत कैसा होने जा रहा है, क्या देश के संविधान से ‘धर्म निरपेक्ष’ शब्द हटेगा? धारा-370 पर क्या होगा? अधोध्या राम मन्दिर पर यह सरकार क्या रूख रखेगी? यह सवाल अवश्य ही भारत के रोजमर्रा के मुद्दे बनेंगे। मंहगाई, रोजगार, कृषि संकट ये वैश्विक परिस्थितियों के अनुसार ही चलेंगे ऐसा अनुमान रहने वाला है चूंकि पिछले पांच वर्ष में उक्त मुद्दों पर भाजपा के वायदों के अनुसार बहुत ही कम काम हो पाया है। सेना के मामले में देश अवश्य कुछ न कुछ सुधार कर रहा है चूंकि वह एक भावनात्मक मुद्दा है, जिसे हर देशवासी आगे भी समर्थन करेगा भले ही उसे खाने, पहनने या आवागमन के लिए भारी कीमतें चुकानी पड़ें।
देशभर के मीडिया में पूरा दिन भाजपा की लोकसभा में जीत व कांग्रेस में हार पर ही चर्चा हुई है जबकि चुनाव हो चुके अब भविष्य का अनुमान लगाया जाना चाहिए, अगले 100 दिन में सरकार किन मुद्दों पर प्राथमिकता से काम शुरू करेगी। यहां तक ये काम कौनसे होंगे ये शायद स्वयं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को ही तय करने हैं, इसमें क्षेत्रीय दलों की कोई खास भूमिका नहीं रहने वाली चूंकि यह बहुमत भाजपा से भी बढ़कर नरेन्द्र मोदी को मिला है। देश के लिए यह बात सबसे सुकून दायक रही है कि देश टुकड़े-टुकड़े सरकार के जंजाल से बच गया है। अब अच्छा या बुरा जो भी होना है देश उस पर एकमत है, भाजपा को भी अब पहले की तरह बेझिझक निर्णय लेने चाहिए। भावी सरकार से देश व देशवासियों को वैश्विक स्तर पर सम्मान मिले व देश का गौरव बढ़े।
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