महामारी में मानवता को बचाने का वक्त

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देश इस वक्त कोरोना महामारी के संकट से जूझ रहा है। अस्पतालों में वेंटिलेटर व आॅक्सीजन की भारी कमी और मरीजों को स्वास्थ्य संबंधी सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। वैक्सीनेशन के लिए मांग के अनुसार राज्यों को टीका भी नहीं मिल रहा, दूसरी तरफ राजनीतिक दल भी संकट में भी राजनीतिक पैंतरे खेल रहे हैं। दरअसल इस वक्त आवश्यकता है कि सभी राजनीतिक दल जिन्हें लाखों लोग चुनते हैं, उनकी बेहतरी के लिए काम करें, लेकिन जहां भी स्वास्थ्य सुविधाओं का टोटा है, वहां लोगों से तालमेल बनाकर सुविधाएं उपलब्ध करवाएं। भले ही पश्चिमी बंगाल में विधान सभा चुनाव हो गए हैं, लेकिन सत्तापक्ष व विपक्ष में बढ़ती तल्खी को देखकर ऐसा लग ही नहीं रहा कि यह दोनों पार्टियां कोरोना महामारी को लेकर गंभीर हैं। दोनों पार्टियों को यह स्वीकार कर लेना चाहिए कि चुनाव हो चुके हैं और अब राज्य को संभालने की आवश्यकता है।

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और राज्यपाल जगदीप धनखड़ के बीच राज्य में हिंसा का मामला पूरे चरम पर है। हिंसा के मामले में अपेक्षित कार्रवाई कर इससे आगे बढ़ने की आवश्यकता है। पंजाब में भी कुछ नेता इस प्रकार की राजनीतिक गतिविधियां कर रहे हैं। जैसे राज्यों में महामारी खत्म हो गई है। दूसरी पार्टी के नेताओं और वर्करों को अपनी पार्टी में शामिल करने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगाया जा रहा है। बहुत कम सांसद और विधायक हैं जो अपने हलके में अस्पतालों की चैकिंग कर लोगों की सुध ले रहे हैं। राजनेताओं की सुस्ती देखकर अधिकारी भी सुस्त पड़ जाते हैं। गत दिवस पटियाला के डिप्टी कमिशनर ने पीपीई किट पहनकर खुद कोरोना वार्ड का दौरा किया लेकिन ऐसे कुछ ही उदाहरण हैं। सावधानी जरूरी है लेकिन इस वक्त नेताओं को सक्रिय होकर काम करना चाहिए, जिससे लोगों का मनोबल बढ़ेगा और तंत्र में कमियों को दूर किया जा सकता है।

कोरोना को लेकर ब्यान तो खूब दिए जाते हैं लेकिन जमीनी स्तर पर जाकर लोगों की मदद कोई-कोई ही कर रहा है। हालात ऐसे हैं कि पंजाब में एक मेडिकल कॉलेज में 70 से अधिक वेंटिलेटर कई महीनों तक बेकार पड़े रहे, यदि उनको ठीक करवाने को लेकर सही समय पर गौर किया जाता तब हजारों मरीजों को लाभ होना था। दरअसल विपक्षी पार्टियों को इस दौर में कोरोना से सुरक्षा विंग बनाना चाहिए, जिसमें मेडिकल और तकनीकी विशेषज्ञ शामिल हों। साथ ही राजनीतिक दलों का यह कर्तव्य है कि वह लोगों को महामारी से लड़ने के लिए जागरूक करें, ताकि लोग अफवाहों से बचकर समय पर अपना उपचार करवाएं। इस वक्त धामिक, नागरिक समूह सब मानवता को बचाने के प्रयास कर रहे हैं। ऐसे में राजनीतिक दल भी अपनी सेवाएं दें।

 

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