कुपोषण और न्यूमोनिया से बचाएगा बाजरा

Published On

सच कहूँ एक्सलुसिव: वर्ष-2022 के खरीफ सीजन के लिए मिलेगा प्रमाणित बीज

  • रारी ने विकसित की दो नई किस्में

  • आयरन व जिंक से भरपूर होगा बाजरा

सच कहूँ/गुरजंट धालीवाल जयपुर। दुर्गापुरा स्थित राजस्थान कृषि अनुसंधान संस्थान (आरएआरआई यानी रारी) ने देश को एनीमिया और कुपोषण से निजात दिलाने के मकसद से बाजरे की दो नई किस्में विकसित की हैं। इन किस्मों को नोटिफाइड किया जा चुका है। वर्ष-2019 में नोटिफाइड हुई इन दोनों किस्मों के प्रमाणित बीज वर्ष-2022 के खरीफ सीजन में किसानों को बुवाई के लिए उपलब्ध होंगे। संस्थान की बाजरा परियोजना के प्रभारी व अतिरिक्त निदेशक अनुसंधान (बीज) डॉ. एल.डी. भारद्वाज ने बताया कि आरएचबी 233 और आरएचबी 234 नामक इन दोनों किस्मों में आयरन 80 से 90 पीपीएम व जिंक 40 से 50 पीपीएम है।

इसका उत्पादन 32 से 33 क्विंटल व चारा उत्पादन 75 से 78 क्विंटल प्रति हेक्टेयर होगा, जो दूसरी किस्मों से ज्यादा है। उन्होंने बताया कि इस बार ब्रीडर सीड यानी प्रजनक बीज तैयार हो चुका है। अब सीड प्रोडेक्शन एजेंसियां इस खरीफ सीजन में आधार बीज तैयार करेंगी और साल 2022 के खरीफ सीजन में किसानों को प्रमाणित बीज मिल सकेगा। इतना ही नहीं बाजरे की इन नई किस्मों से फसल केवल 80 से 81 दिन में पककर तैयार हो जाएगी। नई किस्में ईजाद करने वाले कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि प्रजनन विधि से आयरन और जिंक तत्वों की बढ़ोतरी की कोशिश कामयाब रही है।

ये है इन किस्मों की खासियत

डॉ. एलडी भारद्वाज ने बताया कि भारत में एनीमिया और कुपोषण दो बड़ी समस्याएं हैं। देश में 80 प्रतिशत गर्भवती महिलाओं में आयरन की कमी पाई जाती है। साथ ही 6 से 35 साल तक के 74 फीसदी लोग आयरन की कमी के शिकार हैं। वहीं आयरन के साथ ही जिंक की कमी के चलते देश में बड़े स्तर पर बच्चे कुपोषण की जद में है। जयपुर के राजस्थान कृषि अनुसंधान संस्थान ने देश को एनीमिया और कुपोषण से निजात दिलाने के मकसद से बाजरे की इन दोनों नई किस्मों को विकसित किया है। आरएचबी 233 और आरएचबी 234 नामक ये किस्में जिंक और आयरन से भरपूर हैं, जो महिलाओं को रक्त की कमी और बच्चों को कुपोषण की समस्या से निजात दिलाने में मददगार साबित होगी।

इन राज्यों में कारगर

अब तक क्षेत्रीय लिहाज से बाजरे की किस्में विकसित होती रही हैं, लेकिन इन किस्मों की खास बात यह है कि पहली बार पूरे देश के लिहाज से ये किस्में तैयार की गई हैं। राजस्थान के साथ ही हरियाणा, पंजाब, दिल्ली, तमिलनाडु, गुजरात, उत्तर प्रदेश मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, आंध्रप्रदेश, तमिलनाडु, कर्नाटक, केरल राज्य में बाजरे की अच्छी पैदावार की जा सकती है।

आयरन की कमी से ये नुकसान

आयरन की कमी के चलते महिलाओं में गर्भधारण करने में परेशानी और गर्भ के दौरान बच्चे की मृत्यु होने जैसे मामले सामने आते हैं। वहीं जिंक की कमी के कारण बच्चों की शारीरिक वृद्धि रूकने के साथ ही दस्त, निमोनिया जैसी कई बीमारियों का शिकार उन्हें होना पड़ता है। अब बाजरे की नई किस्मों के सेवन में उन्हें समस्या से काफी हद तक निजात मिल सकेगी। खास बात यह है कि ये समस्याएं समाज के कमजोर तबके में ज्यादा पाई जाती हैं और यही वर्ग बाजरे का ज्यादा सेवन भी करता है।

अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें Facebook और Twitter पर फॉलो करें।

About The Author

Related Posts