MSG Gurumantar Bhandara: धूमधाम से मनाया गया एमएसजी गुरुमंत्र भंडारा, जरूरतमंदों को मिला सहारा, पक्षियों के लिए 353 सकोरे वितरित

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MSG Gurumantar Bhandara: सरसा। शाह सतनाम जी-शाह मस्ताना जी धाम में श्रद्धा, सेवा और मानवता का अनूठा संगम उस समय देखने को मिला, जब एमएसजी गुरुमंत्र भंडारा बड़े ही धूमधाम और उत्साह के साथ मनाया गया। इस पावन अवसर पर श्रद्धालुओं ने बढ़-चढ़कर भाग लिया और गुरु जी के प्रति अपनी आस्था प्रकट की। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य समाज सेवा और मानव कल्याण रहा। भंडारे के दौरान 53 अति जरूरतमंद परिवारों को राशन वितरित किया गया, जिससे कई घरों में खुशियों की रोशनी पहुंची। डेरा श्रद्धालुओं ने बताया कि सेवा कार्य ही सच्ची भक्ति है और इसी भावना के साथ यह पहल की गई। वहीं पक्षियों के लिए 353 सकोरे (मिट्टी के जल पात्र) वितरित किए गए, ताकि बढ़ती गर्मी में परिंदों को पानी की कमी का सामना न करना पड़े।

जैसे इंसानों को पानी की जरूरत होती है, वैसे ही पक्षियों के लिए भी जल अत्यंत आवश्यक है। गर्मी के मौसम में अक्सर पक्षियों को पानी नहीं मिल पाता, जिससे उनकी जान पर बन आती है। ऐसे में सकोरे वितरित कर लोगों को अपने घरों की छतों और आंगनों में पानी रखने के लिए प्रेरित किया गया। इस सेवा कार्य के माध्यम से समाज को यह संदेश दिया गया कि जीव-जंतुओं की सेवा भी उतनी ही जरूरी है जितनी मानव सेवा। साथ ही लोगों से अपील की गई कि वे नियमित रूप से इन सकोरों में साफ पानी भरें, ताकि पक्षियों को राहत मिल सके। एमएसजी गुरुमंत्र भंडारे के इस आयोजन ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि सच्ची भक्ति केवल पूजा तक सीमित नहीं है, बल्कि हर जीव के प्रति दया और सेवा भाव ही उसका असली स्वरूप है। इस अवसर पर पूज्य गुरु जी के अनमोेल वचनो को सुनाया गया।

छाया: सुशील कुमार

इस अवसर पर नशा मुक्ति को लेकर भी जागरूकता फैलाने पर विशेष जोर दिया गया। पूज्य गुरु जी के प्रेरणादायक शब्दों को सुनाते हुए युवाओं को संदेश दिया गया—देश की जवानी, ड्रग की नादानी छोड़ो। इस संदेश ने उपस्थित लोगों, विशेषकर युवाओं को गहराई से प्रभावित किया। डेरा श्रद्धालुओं ने कहा कि नशा न केवल व्यक्ति बल्कि पूरे परिवार और समाज को खोखला कर देता है। इसलिए हमें मिलकर इसके खिलाफ आवाज उठानी चाहिए और एक स्वस्थ, जागरूक समाज का निर्माण करना चाहिए। कार्यक्रम के अंत में सभी ने मिलकर समाज सेवा और नशा मुक्त भारत बनाने का संकल्प लिया। इस भंडारे ने न केवल लोगों को भोजन कराया, बल्कि मानवता, एकता और जागरूकता का संदेश भी दिया।

छाया: सुशील कुमार
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छाया: सुशील कुमार
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