डॉक्टर ने हमारी फीस वापिस करके कह दिया कि तुम्हारा कोई ईलाज नहीं हो सकता…फिर पूज्य गुरु जी के वचन हुए और हो गया चमत्कार…

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प्रेमी अशोक कुमार इन्सां सुपुत्र श्री पिरथी चंद जी, निवासी शहीद भगत सिंह नगर, भटिंडा (पंजाब) से अपने पर हुई पूज्य हजूर पिता संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां की रहमत का वर्णन करते हैं:
प्रेमी जी बताते हैं कि मेरी शादी 27 अगस्त 1986 को हुई। इसके उपरांत दस साल बीत गए, परंतु हमारे घर कोई बच्चा न हुआ। इस बात से हम चिंतित रहते थे। समय-समय पर मैं और मेरी पत्नी निर्मला देवी ने डॉक्टरों के अनुसार टैस्ट भी करवाए। जिसमें मेरी पत्नी की रिपोर्ट तो सही आती, परंतु मेरी रिपोर्ट बिल्कुल निल आती थी। हमने भटिंडा में डॉक्टर से चैकअप करवाया। डॉक्टर ने हमारी फीस वापिस करके कह दिया कि तुम्हारा कोई ईलाज नहीं हो सकता। न इस निल रिपोर्ट का कोई ईलाज है, न ही कोई दवाई है। तुम्हारे बच्चा होना असंभव है। तुम बच्चा गोद ले लो। मैंने लुधियाना से आॅपरेशन भी करवाए, परंतु कोई लाभ नहीं हुआ। जब कोई आशा ही न रही तो हमने मेरे भतीजे पवन बांसल से बच्ची गोद ले ली। नौ महीने बाद, हमारा दुर्भाग्य कि वह बच्ची बिल्कुल स्वस्थ होते हुए भी अचानक थोड़ा बीमार हो गई। डॉक्टर ने उसे ग्लूकोज लगा दिया, परंतु उसके कुछ घंटों के बाद ही वह चल बसी। इस घटना के बाद हम अंदर से बिल्कुल टूट-से गए और अत्यंत दु:खी हो गए। हमारा दुनिया से विश्वास ही उठ गया।

लोग हमें ताने देने लगे कि तुम्हारे भाग्य में तो बच्चा है ही नहीं। अब हमें कोई और बच्चा गोद देने के लिए भी तैयार नहीं था। फिर मेरे बहनोई ने मुझे डेरा सच्चा सौदा के बारे में बताया कि वहां दुनिया के हर दु:ख, बीमारी का ईलाज होता है और हर एक की जायज मांग पूरी होती है। उसके कहने पर हम पति-पत्नी डेरा सच्चा सौदा सरसा दरबार में सत्संग पर गए। सत्संग सुनकर मेरी पत्नी ने पूज्य हजूर पिता संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां से नाम की दात ग्रहण कर ली। पूज्य हजूर पिता जी के सत्संग का मुझ पर भी ऐसा प्रभाव हुआ कि एक महीने बाद मैंने भी नाम-शब्द ले लिया। उसके बाद हम सरसा दरबार में निरंतर सेवा पर जाने लगे।

एक बार की बात है कि मैं सरसा दरबार में सेवा कर रहा था। उस समय पूज्य हजूर पिता जी तेरावास से बाहर आ रहे थे। जब पूज्य पिता जी मेरे पास से गुजरने लगे तो मैंने पूज्य पिता जी के आगे खड़े होकर अर्ज कर दी कि पिता जी, ग्यारह साल हो गए शादी को, पर कोई बच्चा नहीं हुआ। डॉक्टर कहते हैं कि बच्चा गोद ले लो। हमने एक बच्ची गोद ली थी, उसकी भी मृत्यु हो गई है तथा और कोई बच्चा गोद देने को तैयार नहीं है। पूज्य पिता जी ने मेरी अर्ज बड़े ध्यान से सुनी और वचन फरमाया, ‘बेटा, अब कैसे करना है? बच्चा गोद लेना है या अपना हो जाए?’ मैंने कहा कि पिता जी, अपना हो जाए तो बढ़िया है। इस पर पिता जी ने फरमाया, ‘बेटा, दवाई ले लो और सुमिरन करना, बच्चा हो जाएगा।’ पूज्य सतगुरु हजूर पिता जी के वचनानुसार हमने दवाई ले ली।

काम तो वास्तव में पूज्य पिता जी के वचनों ने ही किया। जबकि दवाई तो हम पहले भी ले रहे थे। पूज्य हजूर पिता जी के वचनों के पन्द्रह दिन बाद मैंने अपना चैकअप करवाया तो मेरी रिपोर्ट पूरी सही आई। तीन महीने बाद मेरी पत्नी गर्भवती हो गई। पिता जी के उस एक वचन ने हमारी जिंदगी ही बदल दी। शादी के बारह वर्ष बाद हमारे घर किलकारी गूंजी। बेटे ने जन्म लिया। जब मैंने उस डॉक्टर साहिब को यह खुशखबरी सुनाई तो वह हैरान हो गए और कहने लगे कि मेरे तो हाथ खड़े थे, वास्तव में ही इसका कोई ईलाज नहीं था। वाक्य ही जो हुआ खुद परमात्मा की कृपा से ही हुआ है। जहां पर एक बच्चे की भी आशा नहीं थी, पूज्य सतगुरु पिता जी की रहमत से वहां एक-एक करके पहले दो पुत्र फिर पुत्री ने हमारे यहां जन्म लिया। हम पूज्य पिता जी का ता-उम्र कर्ज नहीं उतार सकते, जिन्होंने असंभव को संभव कर दिया। मेरी सतगुरु जी के पवित्र चरण-कमलों में यही अरदास है कि हमें सारे परिवार को सेवा, सुमिरन का बल बख्शो जी और इसी तरह सच के मार्ग पर चलते हुए हमारी ओड़ निभ जाए जी।

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