आत्मा दुनिया में आकर भूल जाती है गर्भ में किए वादे
पूज्य गुरु जी आगे फरमाते हैं कि जो जीवात्मा अपने मालिक से किए हुए वायदे को तोड़ देती है वह गद्दार के समान बन जाती है। वह आत्मा चंद रुपये-पैसों, मान-बड़ाई और अपनी झूठी वाह-वाह के लिए अपने मालिक से मुनकर हो जाती है।
सुमिरन से ही विचारों पर नियंत्रण संभव
भगवान सर्वव्यापक है। भगवान को अल्लाह, वाहेगुरु, गॉड, खुदा, रब्ब चाहे जो भी नाम दें, लेकिन वो एक ही है। जिस तरह पानी को पानी, आब, वाटर, नीर आदि कहने से उसके रंग, स्वाद में कोई परिवर्तन नहीं आता उसी तरह भगवान का नाम बदलने से उसकी ताकत नहीं बदलती।


























