हमें मुफ्त योजनाएँ नहीं चाहिए, हमारे बच्चे मौत के मुंह में जा रहे, नशा तस्करों को बचाने की बजाय कार्रवाई करे ‘सरकार’
पुलिस लड़की को कहती, ‘आप नशा खरीदो, हम तस्कर पकड़ेंगे’, युवती ने रोते हुए लगाए गंभीर आरोप
चंडीगढ़ (सच कहूँ/अश्वनी चावला)। Chandigarh News: पंजाब में नशे के खिलाफ सरकार की ओर से बड़ी कार्रवाई किए जाने के दावों के बीच वीरवार को उन परिवारों का दर्द सामने आया, जिन्होंने नशे के कारण अपने बेटे खो दिए हैं। परिवारों ने आरोप लगाया कि नशा तस्करों की शिकायत करने वाले युवाओं की हत्या कर उनके शव सड़क किनारे फेंक दिए गए, लेकिन पंजाब पुलिस इस मामले में कार्रवाई करने की बजाय पीड़ित परिवारों पर ही दबाव बना रही है। पंजाब भाजपा की ओर से ‘जवाब मंगदियां मावाँ’ के बैनर तले आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में पंजाब के विभिन्न हिस्सों से पहुंचे करीब 50 नशा पीड़ित परिवारों ने अपनी आपबीती सुनाई, जिससे माहौल भावुक हो गया।
मौके पर करीब आधा दर्जन माताओं ने अपने बेटे खोने का दर्द बयां किया। कई परिवारों ने पुलिस पर तस्करों के खिलाफ कार्रवाई न करने के आरोप लगाए, जबकि कुछ परिवारों ने बताया कि उनके बच्चेण्य अभी भी नशे की गिरफ्त में जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे हैं। प्रेस कॉन्फ्रेंस में मंच पर दर्जनों कुर्सियां खाली रखी गई थीं। इन कुर्सियों पर नशे के कारण जान गंवाने वाले युवाओं की तस्वीरें और उनसे संबंधित खबरें रखी गई थीं। यह तस्वीर उन परिवारों की स्थिति को दर्शा रही थी, जहाँ बेटों की जगह अब उनकी तस्वीरें रह गई हैं। एक अन्य महिला ने बताया कि उसके दोनों बेटे नशे की चपेट में आकर मर चुके हैं। अब वह घरों में झाड़ू-पोछा करके अपना गुजारा कर रही है।
मोरिंडा से आए एक व्यक्ति ने बताया कि उसका बेटा अस्पताल में जिंदगी और मौत की लड़ाई लड़ रहा है और परिवार को पता ही नहीं चला कि वह कब नशे की दलदल में फंस गया। वहीं एक व्यक्ति रोते हुए बताने लगा कि उसका 21 वर्षीय बेटा नशे से तड़प रहा है और अब मौत की दुआ मांग रहा है। उसने कहा कि पूरे गाँव को पता है कि नशा कहाँ से आ रहा है, लेकिन पुलिस कार्रवाई नहीं कर रही। घड़ूआं से आए एक युवक ने खुद नशा करने की बात स्वीकार करते हुए सरकार से मदद की मांग की। शहीद भगत सिंह नगर से आए परिवार ने भी पुलिस पर इसी तरह का आरोप लगाया कि उन्हें तस्करों को पकड़वाने के लिए पहले खुद नशा खरीदने के लिए कहा गया।
अबोहर के एक गाँव से पहुँची नशे के कारण अपने बेटे को खोने वाली एक माँ ने कहा, ‘न मुझे मुफ्त आटा-दाल चाहिए, न मुफ्त यात्रा और न मुफ्त बिजली। हम मेहनत-मजदूरी करके परिवार पालते थे। हमें मुफ्त योजनाएँ नहीं, चिट्टे से छुटकारा चाहिए।’ परिवारों ने कहा कि उन्हें सरकारी घोषणाओं से ज्यादा अपने बच्चों की जिंदगी और मृत परिजनों के लिए इंसाफ चाहिए। अबोहर से ही पहुंची एक युवती ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उसने अपने भाई के नशा करने और नशा बेचने वालों के बारे में पुलिस को जानकारी दी थी। उसके अनुसार, जब उसने पुलिस के 100 नंबर पर फोन किया तो उसे कहा गया, ‘आप नशा खरीदो, हम मौके पर जाकर पकड़ेंगे।’
युवती ने सवाल किया कि जब पुलिस को पहले ही जानकारी दी गई थी कि नशा कहाँ बिक रहा है तो एक आम परिवार को खुद नशा खरीदने और तस्करों का सामना करने के लिए क्यों कहा गया? उसकी माँ ने अपने इकलौते बेटे की मौत का जिक्र करते हुए कहा कि जिसे सड़क किनारे बुरी तरह पीटकर फेंक दिया गया था, वह उसका इकलौता बेटा था। उसने आरोप लगाया कि पुलिसकर्मी कह रहे थे कि चार घंटे तक शव नहीं उठाया जा सकता, क्योंकि उनके पास गाड़ी नहीं है। परिवार की ओर से आरोप लगाया गया कि पोस्टमार्टम करवाने की बजाय उन पर अंतिम संस्कार के लिए दबाव बनाया गया और आज तक उन्हें इंसाफ नहीं मिला।
भाजपा नेता ने पुलिस को घेरते हुए पूछा, जवाबदेही कौन लेगा, शर्म आनी चाहिए?
सुनील जाखड़ ने कहा कि मंच पर रखी खाली कुर्सियां सिर्फ कुर्सियां नहीं, बल्कि उन घरों की तस्वीर हैं, जहाँ नशे ने बेटों को छीन लिया है। उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य यह है कि किसी अन्य माँ का बेटा नशे के कारण न जाए। जाखड़ ने सरकार की ‘युद्ध नशों के विरुद्ध’ मुहिम पर सवाल उठाते हुए कहा कि पहले तीन महीनों में 8,344 मामले और 13 हजार से अधिक गिरफ्तारियों का दावा किया गया था, जबकि अब सरकार की ओर से गिरफ्तारियों की संख्या करीब 79 हजार बताई जा रही है। उन्होंने सवाल किया कि यदि इतनी बड़ी कार्रवाई हुई है तो नशे के कारण मर रहे युवाओं की जिम्मेदारी कौन लेगा? उन्होंने डीजीपी की ओर से नशा बरामद होने वाले इलाकों के पुलिस अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की पुरानी घोषणा का हवाला देते हुए पूछा कि आज तक कितने पुलिस अधिकारियों की जवाबदेही तय की गई है?
‘आप’ सरकार को सत्ता में रहने का नैतिक अधिकार नहीं: केवल सिंह ढिल्लों
पंजाब भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने कहा कि पंजाब में नशे के कारण जितने निर्दोष लोग मारे गए हैं, उनकी संख्या 1984 में मारे गए लोगों से कई गुणा अधिक है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत मान की सरकार को सत्ता में बने रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है और मान को तुरंत पद से इस्तीफा दे देना चाहिए। ढिल्लों ने कहा कि इन परिवारों का दर्द पंजाब के घर-घर की कहानी है और भाजपा इस दर्द को जन आंदोलन में बदलेगी। उन्होंने 18 सितंबर से चार ‘नशा मुक्त पंजाब यात्राएँ’ शुरू करने की घोषणा करते हुए कहा कि भाजपा की सरकार बनने पर दो वर्षों में पंजाब से नशे को जड़ से खत्म करने का वादा किया जाएगा। उन्होंने भाजपा के अन्य राज्यों में हिंसा और गैंगस्टरवाद से निपटने के दावे का हवाला देते हुए कहा कि इसी अनुभव के आधार पर पंजाब को नशामुक्त करने का लक्ष्य रखा जाएगा।