Punjab
Bangladesh Measles Update: बांग्लादेश में खसरे का प्रकोप जारी, अब तक 432 मौतें
60 हजार से अधिक मामले दर्ज
Bangladesh Measles Update: ढाका। बांग्लादेश में खसरे जैसी संक्रामक बीमारी का प्रकोप लगातार गंभीर होता जा रहा है। बीते 24 घंटों के दौरान आठ और लोगों की मृत्यु होने के बाद मृतकों का आंकड़ा बढ़कर 432 तक पहुंच गया है। स्वास्थ्य विभाग के हवाले से स्थानीय मीडिया ने यह जानकारी दी है। स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (डीजीएचएस) के अनुसार बुधवार सुबह तक प्राप्त आंकड़ों में देशभर से बड़ी संख्या में नए संक्रमितों की पुष्टि हुई है। हालात इस कदर चिंताजनक हो चुके हैं कि संदिग्ध और पुष्ट मामलों की कुल संख्या 60 हजार के पार पहुंच गई है। Bangladesh News
आंकड़ों के मुताबिक पिछले एक दिन में 1,489 नए संदिग्ध मरीज सामने आए हैं, जिससे कुल संदिग्ध मामलों की संख्या 53,056 हो गई। वहीं 126 नए संक्रमितों की पुष्टि के साथ कुल पुष्ट मामलों का आंकड़ा 7,150 तक पहुंच गया है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि हाल के वर्षों में यह खसरे का सबसे व्यापक प्रकोप माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर टीकाकरण नहीं होने, स्वास्थ्य सेवाओं की कमी और उपचार में देरी के कारण संक्रमण तेजी से फैला। सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ मुश्ताक हुसैन ने कहा कि यदि शुरुआती स्तर पर प्रभावी कदम उठाए जाते और पर्याप्त चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जातीं, तो बड़ी संख्या में लोगों की जान बचाई जा सकती थी। उन्होंने यह भी कहा कि इतने अधिक मामलों के बावजूद समय रहते सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित नहीं किया गया।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ महबूबा जमील ने उम्मीद जताई कि यदि टीकाकरण अभियान को लगातार गति दी गई तो आने वाले दिनों में संक्रमण के मामलों में कमी देखी जा सकती है। उन्होंने बताया कि जिन क्षेत्रों में टीकाकरण बेहतर ढंग से किया गया है, वहां स्थिति अपेक्षाकृत नियंत्रण में दिखाई दे रही है। विशेषज्ञों ने यह भी माना कि पिछले वर्ष टीकाकरण कार्यक्रम में आई कमजोरी और बच्चों में बढ़ते कुपोषण ने इस बीमारी के फैलाव को और गंभीर बना दिया। Bangladesh News
इधर, राजधानी ढाका के धनमंडी-27 क्षेत्र में ‘सचेतन नागरिक समाज’ के बैनर तले लोगों ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने पूर्व अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मुहम्मद यूनुस और स्वास्थ्य सलाहकार नूरजहां बेगम के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए प्रभावित परिवारों को उचित मुआवजा देने की अपील की।
कुछ रिपोर्टों में इस संकट को ऐसी त्रासदी बताया गया है, जिसे समय रहते रोका जा सकता था। स्थानीय समाचार पत्रों ने भी टीकाकरण व्यवस्था में आई लापरवाही को हालात बिगड़ने का प्रमुख कारण माना है। एक संपादकीय में कहा गया कि वर्षों की मेहनत से तैयार की गई टीकाकरण प्रणाली अब उपेक्षा का शिकार हो गई है। Bangladesh News