Punjab
सोलर ऊर्जा उत्पादन को बड़ी रफ्तार, सीईएल में 200 मेगावाट क्षमता वाले प्लांट का उद्घाटन आज
साहिबाबाद में सेंट्रल इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड की नई इकाई से बढ़ेगा उत्पादन, पूरी तरह ऑटोमेशन आधारित तकनीक
गाजियाबाद (सच कहूँ/रविंद्र सिंह)। Ghaziabad: सौर ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के तहत गाजियाबाद अंतर्गत साहिबाबाद स्थित सेंट्रल इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (सेल ) में 200 मेगावाट वार्षिक क्षमता वाले नए सोलर पैनल उत्पादन प्लांट को तैयार कर लिया गया है। इस अत्याधुनिक इकाई का उद्घाटन आज केंद्रीय एवं राज्य स्तरीय मंत्रियों द्वारा किया जाएगा।
वर्तमान में सीईएल में 40 मेगावाट क्षमता के सोलर पैनल का उत्पादन हो रहा था, लेकिन नई इकाई के शुरू होने के बाद यह क्षमता बढ़कर 200 मेगावाट प्रतिवर्ष हो जाएगी। इससे न केवल उत्पादन में वृद्धि होगी, बल्कि देश में बढ़ती सोलर पैनल की मांग को भी बेहतर तरीके से पूरा किया जा सकेगा।
केंद्रीय मंत्रियों द्वारा किया जाएगा उद्घाटन
सीईएल के जनसंपर्क अधिकारी कृष्ण वीर सिंह के अनुसार, इस प्लांट का उद्घाटन गुरुवार सुबह 11 बजे केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) जितेंद्र सिंह तथा उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री सुनील शर्मा द्वारा किया जाएगा।
पीपीपी मॉडल पर विकसित आधुनिक इकाई
यह परियोजना पीपीपी (पब्लिक प्राइवेट पाटर्नरशिप ) मॉडल पर विकसित की गई है, जिसका उद्देश्य नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में देश को आत्मनिर्भर बनाना है। सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने की सरकारी नीति के तहत यह इकाई एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।
पूरी तरह ऑटोमेशन आधारित उत्पादन प्रणाली
नई उत्पादन इकाई की सबसे बड़ी विशेषता इसका पूर्णतः ऑटोमेशन आधारित सिस्टम है। 200 मेगावाट क्षमता वाली यह लाइन हाई-लेवल ऑटोमेशन तकनीक पर कार्य करेगी, जिसमें कच्चे माल के प्रवेश से लेकर तैयार सोलर पैनल के बाहर निकलने तक की पूरी प्रक्रिया मशीनों द्वारा नियंत्रित होगी।
इस आधुनिक तकनीक के कारण उत्पादन में गुणवत्ता बढ़ेगी, मानवीय त्रुटियों की संभावना कम होगी और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप सोलर पैनल तैयार किए जा सकेंगे।
बाजार में आपूर्ति होगी और मजबूत
नई इकाई के शुरू होने से सोलर पैनल की आपूर्ति श्रृंखला को मजबूती मिलेगी और घरेलू बाजार में उपलब्धता भी बेहतर होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में भारत की स्थिति और सशक्त होगी तथा “मेक इन इंडिया” अभियान को भी गति मिलेगी।
