अंतरराष्ट्रीय सहयोग सुरक्षा तंत्र को मजबूत करने के लिए तकनीकी दक्षता जरूरी: अपर महानिदेशक
गाजियाबाद में आतंकवाद निरोध और कट्टरपंथ उन्मूलन पर तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षण का समापन
गाजियाबाद (सच कहूँ/रविंद्र सिंह)। Ghaziabad News: कमला नेहरू नगर स्थित केंद्रीय गुप्तचर प्रशिक्षण संस्थान (सीडीटीआई), गाजियाबाद में पुलिस अनुसंधान एवं विकास ब्यूरो (बीपीआरएंडडी), गृह मंत्रालय, भारत सरकार के तत्वावधान में आयोजित तीन दिवसीय आतंकवाद निरोध एवं कट्टरपंथ उन्मूलन पाठ्यक्रम का समापन और वैलेडिक्टरी समारोह गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ।
समापन सत्र के मुख्य अतिथि अपर महानिदेशक बीपीआरएंडडी ने कार्यक्रम की सराहना करते हुए आतंकवाद, साइबर कट्टरपंथ, आतंक वित्तपोषण तथा उभरती अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा चुनौतियों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में खुफिया समन्वय, तकनीकी दक्षता और अंतरराष्ट्रीय सहयोग सुरक्षा तंत्र को मजबूत करने के लिए अत्यंत आवश्यक हैं।
9 विदेशी अधिकारियों सहित 30 प्रतिभागियों ने लिया हिस्सा: डॉ. सचिन गुप्ता
सीडीटीआई के निदेशक डॉ. सचिन गुप्ता ने मुख्य अतिथि का स्वागत करते हुए कार्यक्रम की संरचना और उद्देश्यों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस प्रशिक्षण में कोलंबो सिक्योरिटी कॉन्क्लेव के सदस्य देशों बांग्लादेश, मालदीव, मॉरीशस, सेशेल्स और श्रीलंका के 9 अधिकारियों सहित कुल 30 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।इसके अलावा भारतीय पुलिस सेवा, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों और अन्य सुरक्षा एजेंसियों के अधिकारियों ने भी सक्रिय भागीदारी की।
आतंकवाद से जुड़ी आधुनिक चुनौतियों पर विशेषज्ञों ने दिए व्याख्यान
तीन दिवसीय कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों ने कट्टरपंथ, डी-रेडिकलाइजेशन, सीमा पार आतंकवाद, प्रॉक्सी वार, साइबर आतंकवाद, डिजिटल कट्टरपंथ और समुद्री सुरक्षा जैसे विषयों पर व्याख्यान दिए।साथ ही मनी लॉन्ड्रिंग, हवाला नेटवर्क, शेल कंपनियों, क्रिप्टोकरेंसी जांच, ब्लॉकचेन ट्रैकिंग और डार्क वेब गतिविधियों जैसे वित्तीय अपराधों पर भी व्यावहारिक अनुभव साझा किए गए।
अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बताया महत्वपूर्ण
समापन अवसर पर निदेशक डॉ. सचिन गुप्ता ने विदेशी प्रतिभागियों के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम विभिन्न देशों के बीच व्यावसायिक सहयोग, सूचना आदान-प्रदान और सामूहिक सुरक्षा रणनीति को मजबूत करते हैं। उन्होंने भविष्य में भी ऐसे अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रमों के निरंतर आयोजन की आवश्यकता पर बल दिया।
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