Cheetah KGP12: भारत में जन्मी 'केजीपी-12' ने चार चीतों को दिया जन्म
मध्य प्रदेश के कूनो में फिर गूंजी चीतों की किलकारी
Cheetah KGP12: भोपाल, (हि.स.)। मध्य प्रदेश के कूनो राष्ट्रीय उद्यान से चीता संरक्षण अभियान को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। भारत में जन्मी मादा चीता KGP12 ने चार शावकों को जन्म दिया है। यह घटनाक्रम प्रोजेक्ट चीता के चार वर्ष पूरे होने के ठीक बाद सामने आया है। नए शावकों के जन्म के साथ देश में जीवित चीतों की संख्या बढ़कर 56 हो गई है, जिनमें 36 चीते भारत में जन्मे बताए गए हैं।
केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए इस घटनाक्रम की जानकारी साझा की। उन्होंने इसे प्रोजेक्ट चीता के लिए महत्वपूर्ण पड़ाव बताया और कूनो राष्ट्रीय उद्यान तथा संरक्षण अभियान से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों को बधाई दी।
भारत में जन्मी चीता ने बढ़ाई उम्मीद
KGP12 के चार शावकों को जन्म देने का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि उनकी मां स्वयं भारत में जन्मी चीता है। विशेषज्ञों के अनुसार, भारत में जन्मे चीतों की अगली पीढ़ी का जंगल में जन्म लेना पुनर्स्थापना कार्यक्रम के लिए एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम है। प्रोजेक्ट चीता का दीर्घकालिक उद्देश्य भारत में ऐसी आबादी स्थापित करना है, जो प्राकृतिक परिस्थितियों में प्रजनन करते हुए आगे बढ़ सके।
प्रोजेक्ट चीता की शुरुआत 17 सितंबर 2022 को कूनो राष्ट्रीय उद्यान में नामीबिया से लाए गए आठ चीतों के साथ हुई थी। इसके बाद दक्षिण अफ्रीका और अन्य स्रोत देशों से भी चीते भारत लाए गए। अब भारत में जन्मी मादा से नई पीढ़ी का जन्म इस अभियान के अगले चरण की ओर बढ़ने का संकेत माना जा रहा है।
कुछ महीने पहले हुआ था दुखद घटनाक्रम
KGP12 से जुड़े चीता संरक्षण अभियान में इससे पहले एक दुखद घटना भी सामने आई थी। अप्रैल 2026 में इसी मादा चीता के चार शावकों का जन्म हुआ था, लेकिन मई में सभी शावक मृत पाए गए थे। रिपोर्टों के मुताबिक, शव आंशिक रूप से खाए हुए मिले थे और वन विभाग ने जंगली जानवर के हमले की आशंका जताई थी। अब KGP12 के दोबारा चार शावकों को जन्म देने से कूनो में संरक्षण और प्रजनन कार्यक्रम को लेकर नई उम्मीद जगी है। नए शावकों की निगरानी और उनके स्वास्थ्य पर वन विभाग की नजर रहेगी।
ताजा आंकड़ों के अनुसार चार नए शावकों के जन्म से पहले कूनो में 49 और गांधी सागर वन्यजीव अभयारण्य में तीन चीते थे। नए जन्म के बाद कूनो में चीतों की संख्या 53 और मध्य प्रदेश में कुल संख्या 56 हो गई है। इससे चीता संरक्षण के लिए दूसरे आवास के विकास का महत्व भी सामने आता है। प्रोजेक्ट चीता के चार वर्ष पूरे होने के तुरंत बाद हुई इस नई उपलब्धि ने भारत में चीता संरक्षण की कहानी में एक और अध्याय जोड़ दिया है। अब इन शावकों का सुरक्षित विकास और आगे चलकर उनका प्राकृतिक जीवन इस अभियान के लिए अहम रहेगा।