Haryana Government: हरियाणा सरकार का बड़ा फैसला, लाल डोरा और स्वामित्व योजना शिकायतों के लिए नई व्यवस्था लागू

Haryana Government: हरियाणा सरकार का बड़ा फैसला, लाल डोरा और स्वामित्व योजना शिकायतों के लिए नई व्यवस्था लागू

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Haryana Government: प्रतापनगर, राजेन्द्र कुमार। हरियाणा सरकार ने लाल डोरा और स्वामित्व योजना से जुड़ी शिकायतों के त्वरित और पारदर्शी समाधान के लिए नई व्यवस्था लागू कर दी है। अब इन मामलों का निपटारा केवल अधिकृत राजस्व अधिकारी ही करेंगे। सरकार के इस फैसले को ग्रामीण क्षेत्रों में भूमि स्वामित्व विवादों के समाधान की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।

जानकारी के अनुसार विकास एवं पंचायत विभाग द्वारा सभी जिला उपायुक्तों को जारी निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि Haryana Abadi Deh Act 2025 के तहत आने वाली शिकायतों का समाधान केवल अधिनियम में नियुक्त अधिकारियों के माध्यम से ही किया जाएगा।

26 नवंबर 2025 से लागू माना गया कानून | Haryana Government

विकास एवं पंचायत विभाग, चंडीगढ़ द्वारा जारी पत्र के अनुसार इस अधिनियम को 19 जनवरी 2026 को अधिसूचित किया गया था, जबकि इसे 26 नवंबर 2025 से प्रभावी माना गया है। विभाग के संज्ञान में आया था कि लाल डोरा और स्वामित्व योजना से संबंधित शिकायतें कई स्थानों पर BDPO (खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी) और DDPO (जिला विकास एवं पंचायत अधिकारी) कार्यालयों को भेजी जा रही थीं। जबकि अधिनियम में इन अधिकारियों की कोई निर्धारित भूमिका तय नहीं की गई है।

शिकायतों में देरी पर सरकार सख्त

सरकार को मिली रिपोर्ट में सामने आया कि गलत कार्यालयों में शिकायतें भेजे जाने के कारण मामलों के निस्तारण में देरी हो रही थी और फाइलों की अनावश्यक आवाजाही बढ़ रही थी। अब नए निर्देशों के तहत ऐसे सभी मामलों की सुनवाई और समाधान केवल अधिनियम के तहत नियुक्त नायब तहसीलदार (एसी द्वितीय श्रेणी) और तहसीलदार (एसी प्रथम श्रेणी) जैसे राजस्व अधिकारियों द्वारा किया जाएगा।

धारा 15 और 16 के अनुसार होगा समाधान

विभाग ने साफ किया है कि शिकायतों का निपटारा अधिनियम की धारा 15 और 16 के प्रावधानों के अनुसार करना अनिवार्य होगा। इससे पूरी प्रक्रिया अधिक जवाबदेह और पारदर्शी बनने की उम्मीद है।

अब सीधे राजस्व अधिकारियों के पास जा सकेंगे लोग

जिला विकास एवं पंचायत अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि अब लाल डोरा और स्वामित्व योजना से जुड़े मामलों को BDPO या DDPO कार्यालयों में न भेजा जाए। अब शिकायतकर्ता सीधे संबंधित राजस्व अधिकारियों के समक्ष अपनी शिकायत प्रस्तुत कर सकेंगे। इससे प्रक्रिया आसान होगी, शिकायतों का समाधान तेजी से होगा और ग्रामीण लोगों को समय पर राहत मिल सकेगी।

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