Lumpy Skin Disease: बीमार पशुओं को स्वस्थ पशुओं से रखें अलग, लक्षण दिखने पर तुरंत पशु चिकित्सक से करें संपर्क
बीमार पशुओं को स्वस्थ पशुओं से रखें अलग, लक्षण दिखने पर तुरंत पशु चिकित्सक से करें संपर्क
सोनीपत (सच कहूँ न्यूज़)। Lumpy Skin Disease: उपायुक्त नेहा सिंह ने पशुपालकों से लम्पी स्किन डिसीज को लेकर सतर्कता बरतने की अपील की है। उन्होंने कहा कि लम्पी स्किन डिजीज मुख्य रूप से पशुओं में होने वाली संक्रमण विषाणु जनित बीमारी है। लुवास की गाइडलाइन को अपना कर लम्पी स्किन डिजीज से अपने पशुओं को बचाया जा सकता है। लुवास द्वारा लम्पी स्किन डिजीज को लेकर पशुपालकों के लिए एडवाइजरी जारी की गई है। विशेषज्ञों के अनुसार यह बीमारी मुख्य रूप से गाय एवं अन्य गौवंशीय पशुओं को प्रभावित करने वाली संक्रामक विषाणुजनित बीमारी है।
यह बीमारी मनुष्यों में नहीं फैलती, लेकिन पशुओं के स्वास्थ्य और दूध उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव डालने के साथ पशुपालकों को आर्थिक नुकसान पहुंचा सकती है। लम्पी स्किन डिजीज में सामान्यतः तेज बुखार, त्वचा पर गोल एवं कठोर गांठें, लसीका ग्रंथियों में सूजन, कमजोरी, भूख कम होना तथा दूध उत्पादन में कमी जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं।
सही नमूने से जांच जरूरी
लुवास विशेषज्ञों के अनुसार बीमारी की सही पुष्टि के लिए त्वचा की गांठ, गांठ से प्राप्त सामग्री या पपड़ी का नमूना लेना महत्वपूर्ण है। केवल रक्त या नाक के स्वैब पर निर्भर रहने से कुछ मामलों में वायरस की पहचान नहीं हो पाती। नमूना लेते समय जैव-सुरक्षा एवं स्वच्छता का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए।
कीट नियंत्रण और स्वच्छता पर जोर
लम्पी बीमारी मुख्य रूप से मच्छरों, काटने वाली मक्खियों और टिक्स जैसे खून चूसने वाले कीटों से फैल सकती है। इसलिए पशुशाला एवं आसपास पानी जमा न होने दें, नियमित सफाई एवं कीटाणुशोधन करें तथा कीट नियंत्रण के प्रभावी उपाय अपनाएं। बीमार और स्वस्थ पशुओं के लिए चारा-पानी के बर्तन अलग रखें और पशुओं की अनावश्यक आवाजाही से बचें।