Sach Kahoon 24th Anniversary: जसपाल के जज़्बे को सलाम! दोनों हाथ गंवाने के बाद भी हौसला कम नहीं
15 वर्षों से कर रहा सच कहूँ का वितरण
Sach Kahoon 24th Anniversary: ओढ़ां, (राजू)। हरमन प्यारा समाचार पत्र सच-कहूँ आज वीरवार को अपनी 24वीं वर्षगांठ मना रहा है। सच-कहूँ के प्रचार-प्रसार में जितना सच-कहूँ टीम का योगदान है उतना ही वितरक सेवादारों व पाठकों का है। आज हम एक ऐसे होनहार वितरक सेवादार से आपको रू-ब-रू करवा रहे हैं जिसकी सेवा का जज्बा सुनकर आप सब भी हैरान रह जाएंगे। सच-कहूँ अपने इस वितरक सेवादार को दिल से सलाम करता है। हम बात कर रहे हैं सरसा जिला के गांव मलिकपुरा निवासी जसपाल इन्सां की, जिसने 22 वर्ष पूर्व एक हादसे में दोनों हाथ खो दिए, लेकिन हौसला नहीं खोया। हौसले व आत्मविश्वास को जसपाल ने ऐसे समेटा की दिव्यांगता भी उसके सामने नतमस्तक हो गई।
दरअसल जसपाल इन्सां के साथ करीब 22 वर्ष की उम्र में एक दर्दनाक हादसा हुआ। इस हादसे ने उसके दोनों हाथ छीन लिए। हादसे के बाद उसे ये समझ नहीं आ रहा था किवह दोनों हाथों के बगैर अब कैसे जीएगा, कैसे उसकी जिंदगी कटेगी, कौन उसकी संभाल करेगा। इन तमाम सवालों के भंवर में फंसे जसपाल के लिए पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां के पावन वचन नई उम्मीद की किरण साबित हुए। इस उम्मीद की किरण को जसपाल ने ऐसा ढाल बनाया कि आज वह लगभग सभी कार्य स्वयं ही कर लेता है। जसपाल का कहना है कि उसे अब जिंदगी से कोई शिकवा नहीं है।
कोई परेशानी नहीं :-
जसपाल एक अलग ही जोश के साथ सच-कहूँ वितरण की सेवा करता है। जसपाल ने पूछे जाने पर बताया कि उसे सच-कहूँ वितरण में कोई परेशानी नहीं। उसे ये हौसला उसके गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां ने दिया है। वह जो भी कुछ कर रहा है वो पूज्य गुरु जी की रहमत से ही संभव हो पा रहा है। गांव के पाठकों के मुताबिक गांव में सुबह समय पर अखबार का वितरण समय पर हो रहा है। पाठकों ने जसपाल के जज्बे को सलाम करते हुए उसकी सराहना की है।
22 वर्ष पूर्व खो दिए थे दोनों हाथ
करीब 22 वर्ष पूर्व घर के निकट ट्रांसफार्मर पर फ्यूज लगाते समय जसपाल को अचानक करंट लग गया था। इस हादसे में उसे कोहनी से ऊपर तक दोनों हाथ खोने पड़े। हादसे के 2 दिन बाद परिजनों ने जसपाल की शादी के विषय में बातचीत करने जाना था। लेकिन शायद नियति को ये स्वीकार न था। जसपाल ने बताया कि उसे जिंदगी से अब कोई गिला नहीं है। जो लोग कई बार विकट परिस्थितियां आने के बाद हौसला छोड़ देते हैं उन लोगोंं से जसपाल ने अपील करते हुए कहा कि हौसला न छोड़ें। हिम्मत-हौसला है तो सब-कुछ है।
5 वर्षों से दे रहा है निरंतर सेवा, बना रखा है स्पेशल थैला
जसपाल ने जिस दिन से गांव में सच-कहूँ वितरण की सेवा संभाली है तब से वह पिछले निरंतर 15 वर्षों से सराहनीय सेवा दे रहा है। पहले सच-कहूँ नेशनल हाईवे पर गांव मिठड़ी में उतरता था जो उनके गांव से करीब 4 किलोमीटर दूर पड़ता है। अलसुबह उठकर नारा लगाकर वह पैदल ही सच-कहूँ लेने चला जाता। लेकिन कुछ समय बाद अखबार का बंडल उसके घर आना शुरू हो गया। सुबह करीब साढ़े 5 बजे जसपाल के पास सच-कहूँ का बंडल पहुंच जाता है। जसपाल ने अपनी सुविधा के अनुसार स्पेशल थैला बना रखा है। जिसमें अखबार डालकर वह पैदल ही गांव में वितरण के लिए निकल जाता है। जसपाल करीब एक घंटे में ये सेवा पूरी कर लेता है। जसपाल गले में डाले गए स्पेशल थैले से मुंह से अखबार निकालता है और अपने कटे हुए दोनों हाथों से सत्कार से पाठक को दे देता है।