Hydrogen Train News: हाइड्रोजन ट्रेन पहुंची जींद, फिलहाल हैंडओवर होने का इंतजार

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हाइड्रोजन प्लांट में खड़ा है ट्रेन का इंजन

  • ट्रेन एक किलो हाइड्रोजन में करीब साढ़े चार लीटर डीजल के बराबर माइलेज देगी
  • इलेक्ट्रिक की तुलना में हाइड्रोजन ट्रेन 10 गुणा अधिक दूरी तय करेगी

जींद (सच कहूँ/गुलशन चावला)। Hydrogen Train News: जींद से सोनीपत रूट पर चलने वाली हाइड्रोजन ट्रेन जींद पहुंच चुकी है। हालांकि अभी तक हाइड्रोजन प्लांट को हैंडओवर नही है और इसका इंजन हाइड्रोजन प्लांट में ही खड़ा है। इस ट्रेन को लेकर न तो कोई फोटो खींचने दिया जा रहा है और न ही इसका वीडियो बनाने दिया जा रहा है। हाइड्रोजन प्लांट अधिकारियों का कहना है कि जब तक यह हैंडओवर नही होती तब तक इसके बारे में पुष्ट जानकारी दे पाना असंभव है। हालांकि यह देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन है जो एक किलो हाइड्रोजन में करीब साढ़े चार लीटर डीजल के बराबर माइलेज देगी। वहीं इन ट्रेनों का रखरखाव भी सस्ता होगा। Jind News

इलेक्ट्रिक की तुलना में हाइड्रोजन ट्रेन 10 गुणा अधिक दूरी तय कर सकती हैं। ट्रेन 360 किलोग्राम हाइड्रोजन में 180 किमी का सफर करेगी। ट्रेन में दो पावर प्लांट होंगे। ईंधन सेल की लागत और रखरखाव भी कम खर्च वाला है। ट्रेनों में आवाज नहीं होगी। जींद से सोनीपत की दूरी लगभग 90 किलोमीटर है। यह ट्रेन 110 से 140 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से चलेगी। फिलहाल हाइड्रोजन प्लांट में टेस्टिंग का कार्य चल रहा है। इसी माह के अंत तक यह ट्रेन चलने की उम्मीद है। जींद रेलवे जंक्शन पर लगभग 120 करोड़ रुपये की लागत से दो हजार मीटर एरिया में हाइड्रोजन गैस प्लांट का निर्माण चल रहा है। हाइड्रोजन गैस से चलने वाले इंजन धुएं की बजाय भांप और पानी छोड़ेंगे। इसलिए इसमें धुआं नहीं निकलेगा। इसकी रफ्तार और यात्रियों को ले जाने की क्षमता भी डीजल ट्रेन के बराबर होगी। आवाज न होने के चलते यात्री आरामदायक सफर कर सकेंगे। Jind News

हाइड्रोजन प्लांट में जमीन के नीचे भंडारण तैयार किया गया है। इसमें लगभग तीन हजार किलोग्राम गैस भंडारण होगी। ट्रेन को हर घंटे 40 हजार लीटर पानी की जरूरत होगी। वहीं स्टेशन की छतों का पानी भी प्लांट तक पहुंचाया जाएगा। हाइड्रोजन से चलने वाली ट्रेन आठ-दस डिब्बों की होगी। यह हाइब्रिड ट्रेनें होंगी। जिनमें अक्षय ऊर्जा भंडारण जैसे बैटरी या सुपर कैपेसिटर लगे होंगे। ईंजन में डीजल की जगह फ्यूल सेल, हाइड्रोजन और ऑक्सीजन डाली जाएगी। ऑक्सीजन की मदद से हाइड्रोजन नियंत्रित ढंग से जलेगी और इस ताप से बिजली पैदा होगी। बिजली लिथियम आयन बैटरी को चार्ज करेगी। जिससे ट्रेन चलेगी। इस दौरान धुएं की जगह सिर्फ भाप और पानी निकलेगा। Jind News

हाइड्रोजन प्लांट प्रोजेक्ट मैनेजर संजय कुमार ने बताया कि हाइड्रोजन ट्रेन जींद पहुंची तो है लेकिन हैंडओवर नही हुई है। ट्रेन कब चलेगी, इसकी निर्धारित तारीख अभी नहीं आई है। पहले तो इस ट्रेन का ट्रायल होगा।

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