Monsoon Update: राजस्थान, यूपी व उत्तराखंड वासियों के लिए ख़ुशखबरी! ''झमाझम बारिश के लिए तैयार रहें सभी''
कमजोर मानसून से खरीफ फसलों की बुवाई प्रभावित, खरीफ बुवाई 23% घटी
Monsoon Update: नई दिल्ली/हिसार (सच कहूँ/संदीप सिंहमार)। पूर्वी राजस्थान, पूर्वी उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में दक्षिण-पश्चिम मानसून का लंबा इंतजार अब जल्द खत्म होने वाला है। देश के कई हिस्सों में तय समय से पीछे चल रहा मानसून अब तेजी से आगे बढ़ने के संकेत दे रहा है। सामान्य परिस्थितियों में मानसून 20 जून के आसपास पूर्वी उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के कुछ हिस्सों में पहुंच जाता है, लेकिन इस बार इसकी रफ्तार धीमी रहने के कारण करीब 10 दिनों की देरी हुई। Monsoon News
इसी वजह से दोनों राज्यों के अधिकांश हिस्सों में अब तक गर्म और उमस भरा मौसम बना हुआ है। अब मौसम की परिस्थितियां मानसून के आगे बढ़ने के लिए अनुकूल हो गई हैं। पूर्वी उत्तर प्रदेश के ऊपर एक चक्रवाती परिसंचरण बना हुआ है। इसके साथ ही बंगाल की खाड़ी से आने वाली नमी से भरपूर पूर्वी हवाएं उत्तर प्रदेश के पूर्वोत्तर हिस्सों तक पहुंचने लगी हैं। इन दोनों मौसम प्रणालियों के प्रभाव से मानसून को उत्तर दिशा में तेजी से आगे बढ़ने में मदद मिलेगी और आने वाले दिनों में बारिश की गतिविधियां बढ़ेंगी।
मौसम प्रणाली और मजबूत होगी, जिससे उत्तर प्रदेश और उससे लगे उत्तराखंड में बारिश का दायरा और तीव्रता बढ़ेगी। 2 जुलाई तक उत्तर प्रदेश के अधिकांश हिस्सों और पूरे उत्तराखंड में व्यापक मानसूनी बारिश होने की उम्मीद है। इस दौरान कुछ स्थानों पर मध्यम से भारी बारिश भी हो सकती है, जिससे इन क्षेत्रों में मानसून का प्रभावी आगमन माना जाएगा। Monsoon News
गर्मी से मिलेगी राहत, किसानों के लिए खुशखबरी
बारिश बढ़ने के साथ ही गर्म और उमस भरे मौसम से राहत मिलने लगेगी। बादल छाने और लगातार बारिश होने से दिन के तापमान में गिरावट आएगी तथा मौसम सुहावना हो जाएगा। मानसून की देरी के कारण किसान खरीफ फसलों की बुवाई शुरू नहीं कर पा रहे थे। जुलाई के पहले सप्ताह में व्यापक बारिश होने से मिट्टी में पर्याप्त नमी आएगी, जिससे धान, मक्का, दलहन और अन्य खरीफ फसलों की बुवाई के लिए अनुकूल परिस्थितियां बनेंगी। उत्तर प्रदेश के मैदानी क्षेत्रों के साथ-साथ उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में भी जुलाई के पहले सप्ताह के दौरान कई दौर की बारिश होने की संभावना है और कुछ स्थानों पर भारी वर्षा भी दर्ज की जा सकती है।
देश में तिलहन को सबसे ज्यादा नुकसान
नई दिल्ली। अल नीनो के कारण कमजोर हुए मानसून का असर अब खरीफ फसलों की बुवाई पर पड़ रहा है। बीते साल की तुलना में इस साल खरीफ की बुवाई करीब 54 लाख हेक्टेयर कम हुई है। इसमें सबसे बुरा हाल तिलहनी फसलों (सोयाबीन और मूंगफली) का बना हुआ है। कृषि मंत्रालय के नए आंकड़ों के अनुसार, इस साल 25 जून तक पूरे देश में फसलों की बुवाई पिछले साल के मुकाबले करीब 23 फीसदी (53.74 लाख हेक्टेयर) कम हुई है। Monsoon News
पिछले साल इस समय तक जहाँ करीब 236 लाख हेक्टेयर से ज्यादा खेतों में बुवाई हो चुकी थी, वहीं इस साल करीब 183 लाख हेक्टेयर खेतों में ही बिजाई हो सकी है। मौसम विभाग का पैमाना बताता है कि 30 जून तक औसत बारिश का 40 प्रतिशत पानी नहीं बरसा। जून का महीना लगभग सूखा बीतने की वजह से खेतों में नमी गायब है और बुवाई का काम काफी अटक गया है।
इस सीजन की सबसे मुख्य फसल धान की बुवाई अब तक केवल 26 लाख हेक्टेयर में हो सकी है, जबकि पिछले साल इसी दौरान यह 34 लाख हेक्टेयर से ज्यादा हो चुकी थी। इस तरह धान के खेतों में लगभग 25 प्रतिशत की बड़ी कमी आई है। मोटे अनाज का रकबा चार लाख हेक्टेयर कम चल रहा है। दलहन की कुल बुवाई पिछले साल के 21 लाख हेक्टेयर से घटकर इस बार सिर्फ 15 लाख हेक्टेयर रह गई है, जो कि सीधे-सीधे 30 प्रतिशत की भारी गिरावट है। खासतौर पर अरहर, उड़द और मूंग जैसी जरूरी दालों की बुवाई बहुत पिछड़ गई है। Monsoon News
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