Lawyers' Strike: मानसा के वकील पर एफआईआर के खिलाफ पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ की बार एसोसिएशनों का कामकाज स्थगित
अमनिंदर सिंह मान के समर्थन में वकीलों की संयुक्त कार्रवाई समिति ने किया आह्वान
Lawyers' Strike: चंडीगढ़(सच कहूँ/हि.स.)। मानसा के अधिवक्ता अमनिंदर सिंह मान के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी के विरोध में पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ की बार एसोसिएशनों ने मंगलवार को न्यायिक कार्य से दूरी बनाए रखी। वकीलों का आरोप है कि सोशल मीडिया पर की गई कथित टिप्पणी के मामले में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धाराएं लगाना उचित नहीं है। अमनिंदर सिंह मान के खिलाफ जुलाई में आम आदमी पार्टी के नेता और पंजाब राज्य अनुसूचित जाति आयोग के पूर्व अध्यक्ष जसवीर सिंह गढ़ी से संबंधित कथित जातिसूचक टिप्पणी के मामले में प्राथमिकी दर्ज की गई थी।
पुलिस के अनुसार, मानसा के साइबर अपराध थाने में 18 अगस्त को मामला दर्ज किया गया। प्राथमिकी में आरोप है कि अमनिंदर सिंह मान ने 7 जुलाई को सोशल मीडिया पर जसवीर सिंह गढ़ी के संबंध में आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। इसके बाद पंजाब राज्य अनुसूचित जाति आयोग ने 14 जुलाई को मामले का स्वतः संज्ञान लिया था। आयोग ने पुलिस को प्राथमिकी दर्ज करने और कार्रवाई की जानकारी देने के निर्देश दिए थे। इस मामले में अब तक किसी गिरफ्तारी की सूचना नहीं है।
बार एसोसिएशनों ने उठाए कानूनी सवाल
जिला बार एसोसिएशन मानसा के अध्यक्ष अधिवक्ता गुरदास सिंह मान ने कहा कि अमनिंदर सिंह मान ने गढ़ी के संबंध में टिप्पणी की थी, लेकिन उनके अनुसार इस मामले में विशेष अधिनियम की धाराएं लगाना उचित नहीं है। अधिवक्ताओं का कहना है कि संबंधित सोशल मीडिया पोस्ट में ऐसा कोई तथ्य नहीं था, जिसके आधार पर अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया जाना चाहिए था। हालांकि, इन दावों पर अंतिम निर्णय जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।
इस मामले के विरोध में मानसा की जिला और उपमंडलीय अदालतों में वकीलों ने शुक्रवार और शनिवार को कामकाज स्थगित रखा था। इसके बाद सोमवार को पंजाब की विभिन्न बार एसोसिएशनों ने भी अमनिंदर सिंह मान के समर्थन में कार्य बहिष्कार किया। अब संयुक्त कार्रवाई समिति ने मंगलवार को पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ की सभी बार एसोसिएशनों से कामकाज स्थगित रखने की अपील की थी। इसके बाद कई बार एसोसिएशनों ने इस कार्रवाई में हिस्सा लिया। अधिवक्ताओं ने प्राथमिकी और विशेष अधिनियम की धाराओं की वैधानिकता पर सवाल उठाए हैं। फिलहाल मामला पुलिस जांच के अधीन है। संबंधित आरोपों पर अंतिम निर्णय अदालत की प्रक्रिया के अनुसार होगा।