Rajasthan Tourism: राजस्थान की लोकेशन्स देखकर फिल्म बनाने का मन करता है: अनिल शर्मा

फिल्म पर्यटन नीति से प्रदेश को ग्लोबल स्क्रीन पर पहुंचाने की तैयारी

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Rajasthan Tourism: जयपुर, 8 सितंबर। राजस्थान की लोकेशन्स अब सिर्फ फिल्म की कहानी का बैकड्रॉप नहीं, बल्कि प्रदेश की पर्यटन ब्रांडिंग का बड़ा माध्यम बन रही हैं। इसी कड़ी में फिल्म निर्देशक-निर्माता अनिल शर्मा की आगामी फिल्म ‘अर्जुन नागा’ की शूटिंग राजस्थान में करीब 40 दिन होगी। जयपुर और जैसलमेर फिल्म के प्रमुख शूटिंग स्थल होंगे। राजस्थान पर्यटन आयुक्त रुक्मणी रियाड़ के अनुसार, फिल्म की शूटिंग राजस्थान के लिए केवल एक फिल्म प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि प्रदेश की विरासत, संस्कृति और प्राकृतिक विविधता को बड़े दर्शक वर्ग तक पहुंचाने का अवसर है।

राजस्थान पर्यटन भवन में हुई विशेष बातचीत में अनिल शर्मा ने राजस्थान के प्रति अपने जुड़ाव और यहां की लोकेशन्स की तारीफ करते हुए कहा, “मुझे राजस्थान से लगाव है। राजस्थान रहने और बसने के लिहाज से अच्छा है ही, फिल्मों के लिए भी बेहद अनुकूल है। यहां की लोकेशन्स ऐसी हैं कि उन्हें देखकर फिल्म के पर्दे पर उतारने का मन करता है।” 

उन्होंने कहा कि अर्जुन नागा फिल्म में उत्कर्ष शर्मा, गुलशन ग्रोवर, अर्जुन रामपाल और निधि अग्रवाल प्रमुख भूमिकाओं में हैं। राजस्थान और अनिल शर्मा का फिल्मी रिश्ता भी पुराना है। उनकी फिल्मों ‘गदर : एक प्रेम कथा’, ‘अब तुम्हारे हवाले वतन साथियो’, ‘वीर’ और ‘ऐलान-ए-जंग’ का राजस्थान से शूटिंग संबंध रहा है। ‘अब तुम्हारे हवाले वतन साथियो’ में जैसलमेर और ‘वीर’ में जयपुर के आमेर की लोकेशन्स नजर आई थीं। ‘अर्जुन नागा’ के लिए राजस्थान का चयन इस पुराने जुड़ाव को आगे बढ़ाता है।

शर्मा ने कहा कि फिल्मकारों के लिए किसी राज्य में शूटिंग की सुविधा केवल लोकेशन तक सीमित नहीं होती। शूटिंग के दौरान स्थानीय प्रशासन और पर्यटन विभाग का सहयोग भी उतना ही महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा की राजस्थान पर्यटन विभाग का उन्हें लगातार सहयोग मिलता रहा है। निर्माता-निर्देशक अनिल शर्मा ने कहा कि राजस्थान में लोकेशन्स की विविधता उसे फिल्मकारों के लिए खास बनाती है। जयपुर की राजसी इमारतें और स्थापत्य, जैसलमेर का स्वर्णिम दुर्ग और थार के धोर, जोधपुर के किले, उदयपुर की झीलें और महल, पुष्कर का धार्मिक-सांस्कृतिक परिवेश तथा शेखावाटी की हवेलियां एक ही प्रदेश में अलग-अलग तरह की सिनेमाई पृष्ठभूमि उपलब्ध कराती हैं। यही वजह है कि राजस्थान ऐतिहासिक फिल्मों के साथ रोमांस, एक्शन, सामाजिक कथानक और अंतरराष्ट्रीय फिल्मों की शूटिंग के लिए भी लगातार आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।

पर्यटन आयुक्त रियाड़ ने कहा की राज्य सरकार ने इस संभावनाओं को पर्यटन से जोड़ते हुए फिल्म पर्यटन प्रोत्साहन नीति-2025 लागू की है। नीति का उद्देश्य राजस्थान को फिल्म निर्माताओं के लिए अनुकूल शूटिंग डेस्टिनेशन बनाना और फिल्मों के माध्यम से प्रदेश के पर्यटन स्थलों की पहुंच देश-विदेश तक बढ़ाना है। शूटिंग से जुड़ी विभिन्न अनुमतियों को सरल बनाने के लिए सिंगल-विंडो व्यवस्था उपलब्ध कराई गई है। इसके जरिए फिल्मकारों के लिए शूटिंग प्रक्रिया को सुगम बनाने पर जोर दिया गया है।

आयुक्त रियाड़ के अनुसार, राजस्थान का लक्ष्य अब फिल्मों के लिए केवल लोकेशन उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि फिल्म निर्माण और पर्यटन को एक-दूसरे की ताकत बनाने का है। प्रदेश की कोशिश है कि यहां आने वाला फिल्मकार राजस्थान की विरासत और संस्कृति को अपनी कहानी में शामिल करे और फिल्म रिलीज होने के बाद वही दृश्य पर्यटकों को राजस्थान आने के लिए प्रेरित करें।

राजस्थान पहले भी बना सिनेमा की पसंद

राजस्थान में ‘जोधा अकबर’, ‘उमराव जान’, ‘दिल्ली-6’, ‘बजरंगी भाईजान’, ‘ये जवानी है दीवानी’, ‘रंग दे बसंती’, ‘बाजीराव मस्तानी’, ‘वीर’, ‘गुलाल’ और ‘नन्हे जैसलमेर’ जैसी फिल्मों की शूटिंग हुई है। इन फिल्मों ने प्रदेश के किलों, महलों, शहरों और ग्रामीण परिवेश को बड़े पर्दे पर पहचान दी।

हॉलीवुड से अंतरराष्ट्रीय सिनेमा तक पहुंच

राजस्थान की लोकेशन्स अंतरराष्ट्रीय फिल्मकारों की भी पसंद रही हैं। ‘ऑक्टोपसी’, ‘द बेस्ट एग्जॉटिक मैरिगोल्ड होटल’, ‘द सेकंड बेस्ट एग्जॉटिक मैरिगोल्ड होटल’, ‘द दार्जिलिंग लिमिटेड’, ‘द फॉल’, ‘होली स्मोक!’, ‘द डार्क नाइट राइजेज’, ‘वायसरॉयज हाउस’, ‘मैरिगोल्ड’ और ‘वन नाइट विद द किंग’ जैसी प्रस्तुतियों में राजस्थान नजर आया। जयपुर, उदयपुर, जोधपुर और जैसलमेर के जरिए प्रदेश की दृश्यात्मक पहचान अंतरराष्ट्रीय दर्शकों तक पहुंची।

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