मालदा में बाढ़ का कहर, परिवारों में कोहराम; गंगा के कटाव से बढ़ी चिंता

पीड़ित महिला का आरोप - सरकार नहीं ले रही सुध

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मालदा (सच कहूँ/एजेंसी)। पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में बाढ़ और गंगा नदी के तेज कटाव ने ग्रामीण इलाकों में जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। मानिकचक और रतुआ क्षेत्र में स्थिति विशेष रूप से गंभीर बताई जा रही है। कई गांवों में पानी पहुंचने के कारण लोगों को आवागमन, भोजन और रहने की जगह जैसी बुनियादी जरूरतों के लिए भी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। रतुआ क्षेत्र की चार ग्राम पंचायतों में बड़ी संख्या में लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। कई संपर्क मार्ग जलमग्न हो चुके हैं। स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र और एक ग्राम पंचायत कार्यालय तक पानी पहुंचने से प्रशासनिक और स्वास्थ्य सेवाओं पर भी असर पड़ा है।

बांध टूटने से कई गांवों में संकट

भूतनी क्षेत्र में बांध टूटने के बाद हालात और बिगड़ गए। बताया जा रहा है कि इसके कारण 100 से अधिक गांवों पर बाढ़ का असर पड़ा है। दूसरी ओर, गंगा के लगातार कटाव से कई परिवारों के सामने दोहरी मुसीबत खड़ी हो गई है। पानी के साथ जमीन खिसकने से घर और कृषि भूमि भी नदी में समा रही है।

भुटनी दियारा क्षेत्र की एक महिला ने अपनी परेशानी बताते हुए कहा कि नदी के कटाव में उनका घर चला गया। उनके सामने रहने और भोजन की समस्या खड़ी है। उन्होंने बताया कि घर का सामान भी पानी में बह गया और परिवार को बच्चों के साथ बेहद कठिन परिस्थितियों में रहना पड़ रहा है। महिला के अनुसार, उनके चार बच्चे हैं और उन्हें स्थानीय स्तर पर अपेक्षित सहायता नहीं मिल सकी है।

हर साल कटाव, फिर भी स्थायी समाधान का इंतजार

स्थानीय लोगों का कहना है कि भुटनी दियारा के कई टोले और गांव लंबे समय से नदी कटाव की समस्या झेल रहे हैं। कुछ स्थानों पर घरों में पानी घुसने से लोगों को सुरक्षित स्थानों की तलाश करनी पड़ रही है। एक बुजुर्ग निवासी ने प्रभावित लोगों की संख्या काफी अधिक होने का दावा करते हुए कहा कि वर्षों से कटाव के बाद मरम्मत और बचाव कार्यों पर बड़ी रकम खर्च होती रही है, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका।

स्थानीय लोगों ने लंबे समय से दियारा क्षेत्र के लिए ठोस और स्थायी व्यवस्था की मांग की है। उनका कहना है कि सरकारें बदलती रहीं, लेकिन नदी कटाव से होने वाले विस्थापन का सिलसिला जारी रहा। मौजूदा सरकार की ओर से प्रभावित लोगों को सहायता उपलब्ध कराने का भरोसा दिया गया है। अब ग्रामीणों की नजर राहत के साथ-साथ ऐसे स्थायी उपायों पर है, जिनसे हर साल बाढ़ और कटाव के कारण होने वाले नुकसान को कम किया जा सके।

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