Paddy Stubble: दुन्नेवाला का सुखराज सिंह 21 एकड़ रकबे में धान की पराली का बिना आग लगाए कर रहा प्रबंधन
पराली को खेत में ही मिलाकर हैप्पी सीडर व सुपर सीडर से गेहूँ की बुवाई कर रहा सुखराज
बठिंडा (सच कहूँ न्यूज)। Agriculture News: जिला बठिंडा के संगत ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले गांव दुन्नेवाला का किसान सुखराज सिंह 21 एकड़ रकबे में धान की पराली को बिना आग लगाए उसका प्रबंधन कर रहा है। पिछले 6-7 वर्षों से सुखराज सिंह हैप्पी सीडर और सुपर सीडर का इस्तेमाल कर पराली को खेतों में ही मिला रहा है, जिससे उसकी गेहूं और धान की पैदावार में बढ़ोतरी हुई है। किसान सुखराज सिंह ने बताया कि वह करीब 24 एकड़ जमीन पर खेती करता है और 21 एकड़ में धान की खेती कर रहा है। उसने सबसे पहले 10 एकड़ जमीन में बिना आग लगाए पराली का प्रबंधन किया। 10 एकड़ में हैप्पी सीडर मशीन से धान की पराली के खड़े अवशेषों में गेहूं की बुवाई की और दूसरे वर्ष उसने यह रकबा बढ़ाकर 18 एकड़ कर लिया। पराली को खेत में ही मिलाकर उसने पहले वर्ष हैप्पी सीडर और दूसरे वर्ष सुपर सीडर से गेहूँ की बुवाई की।
इस तरह गेहूँ की पैदावार काफी अच्छी रही। किसान ने बताया कि सुपर सीडर मशीन धान की पराली को खेत में ही बारीक काटकर मिट्टी में मिला देती है, जिससे धुएं और प्रदूषण से राहत मिलती है। मिट्टी में मिलकर पराली गल जाती है और देसी खाद का काम करती है। इससे मिट्टी में मौजूद मित्र कीट, जैसे केंचुए भी सुरक्षित रहते हैं। सुपर सीडर से एक ही चक्कर में खेत की जुताई, पराली को मिट्टी में मिलाने और बुवाई का काम हो जाता है। इससे बार-बार तवियों या रोटावेटर चलाने की जरूरत नहीं पड़ती, जिससे डीजल और समय दोनों की बचत होती है। खेत में पराली मिली होने के कारण मिट्टी में नमी लंबे समय तक बनी रहती है, जिससे पहली सिंचाई की जरूरत देर से पड़ती है और पानी की खपत भी कम होती है।
जमीन की सेहत में हुआ सुधार: किसान
उन्होंने कहा कि इस तरह खेती करने से जमीन की सेहत में सुधार होने के साथ गेहूँ के पौधे का फुटाव अच्छा होता है और फसल की पैदावार भी बेहतर निकलती है। गेहूँ की फसल को अंत तक बारिश और तेज हवा से भी कोई नुकसान नहीं हुआ तथा गेहूँ में खरपतवार की समस्या भी कम रही। उन्होंने गेहूँ के बीज को 4 मिलीलीटर क्लोरपाइरीफॉस प्रति किलो की दर से उपचारित करके बुवाई की, जिससे गेहूँ की फसल में गुलाबी सुंडी का हमला कम हुआ। पहले वर्ष हैप्पी सीडर विधि और दूसरे वर्ष सुपर सीडर विधि से क्रमश: 24 क्विंटल और 25 क्विंटल प्रति एकड़ पैदावार प्राप्त हुई। उन्होंने सभी किसानों से अपील की कि हैप्पी सीडर या सुपर सीडर मशीन से बुवाई की जाए, ताकि पानी की बचत, मिट्टी की उपजाऊ शक्ति और मिट्टी में कार्बनिक पदार्थ की मात्रा में वृद्धि हो सके।