यशोदा मेडिसिटी  में एपीएलए से पीड़ित 28 वर्षीय महिला का हाई रिस्क किडनी ट्रांसप्लांट सफल

पति ने दी एबीओ-संगत किडनी, प्लाज्माफेरेसिस, आईवीआईजी  और एंटीकोएगुलेशन से जटिलताओं का किया प्रबंधन

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गाजियाबाद (सच कहूँ /रविंद्र सिंह)। इंदिरापुरम स्थित  यशोदा मेडिसिटी के चिकित्सकों ने एंटीफॉस्फोलिपिड एंटीबॉडी सिंड्रोम ( एपीएलए) से पीड़ित 28 वर्षीय महिला का हाई रिस्क किडनी ट्रांसप्लांट सफलतापूर्वक किया। महिला को रक्त के थक्के बनने का अधिक खतरा होने के साथ डोनर-स्पेसिफिक एंटीबॉडी (डीएसए ) की चुनौती भी थी। 18 अगस्त को महिला के पति द्वारा दान की गई एबीओ -संगत किडनी का प्रत्यारोपण किया गया। चिकित्सकों के अनुसार, मरीज को करीब डेढ़ वर्ष पहले सिस्टमिक ल्यूपस एरिथेमेटोसस (एसएलई ) के कारण एपीएलए का पता चला था। बाद में वह क्रोनिक किडनी डिजीज से पीड़ित हो गईं। तीन बार गर्भपात और कई बार ब्लड ट्रांसफ्यूजन की मेडिकल हिस्ट्री के कारण ट्रांसप्लांट के दौरान इम्यून संबंधी जटिलताओं का खतरा भी था।

यशोदा मेडिसिटी की मल्टीडिसिप्लिनरी टीम ने ट्रांसप्लांट से पहले डीएसए  के खतरे को कम करने के लिए प्लाज्माफेरेसिस के तीन सेशन और आइजीवीआई  थेरेपी दी। रक्त के थक्के बनने के जोखिम को नियंत्रित करने के लिए ट्रांसप्लांट से पांच दिन पहले वारफेरिन रोककर हेपरिन के माध्यम से एंटीकोएगुलेशन किया गया। टीम में डॉ. वैभव सक्सेना, डॉ. कुलदीप अग्रवाल, डॉ. प्रजीत मजूमदार और डॉ. इंद्रजीत जी. मोमिन शामिल रहे। चिकित्सकों के मुताबिक ऑपरेशन के बाद मरीज का यूरिन आउटपुट अच्छा रहा और प्रत्यारोपित किडनी का कामकाज स्थिर रहा। डिस्चार्ज के समय सीरम क्रिएटिनिन 0.7 एमजी /डीएल  था, जबकि फॉलोअप में यह 0.9 एमजी /डीएल  दर्ज किया गया।                     

प्रत्यारोपित किडनी में रक्त प्रवाह बनाए रखना चुनौतीपूर्ण था :डॉ वैभव सक्सेना 

डॉ. वैभव सक्सेना ने बताया कि एपीएलए के कारण रक्त के थक्के बनने का खतरा अधिक होने से प्रत्यारोपित किडनी में रक्त प्रवाह बनाए रखना चुनौतीपूर्ण था। सर्जरी के दौरान और बाद में एंटीकोएगुलेशन की सावधानीपूर्वक निगरानी की गई। डॉ. प्रजीत मजूमदार ने कहा कि एपीएलए  और डीएसए  दोनों की मौजूदगी में ट्रांसप्लांट के लिए एंटीकोएगुलेशन, प्लाज्माफेरेसिस और आईवीआईजी की सुनियोजित रणनीति जरूरी थी। मरीज को अब वारफेरिन आधारित एंटीकोएगुलेशन और ट्रिपल इम्यूनोसप्रेसिव थेरेपी दी जा रही है तथा नियमित पीटी -आईएनआर और मेडिकल फॉलोअप किया जा रहा है।

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