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Hanumangarh News: फर्जी वसीयत बनाकर करोड़ों की संपत्ति हड़पने का आरोप
पिता-पुत्र सहित नोटरी पब्लिक और दो अन्य पर आरोप
हनुमानगढ़। जंक्शन थाना पुलिस ने न्यायालय मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट से प्राप्त इस्तगासे के आधार पर फर्जी वसीयत तैयार कर संपत्ति हड़पने के आरोप में पांच व्यक्तियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। परिवादिया सरोज (50) पत्नी सुरेश कुमार निवासी पारीक कॉलोनी, टाउन ने न्यायालय में प्रस्तुत परिवाद में आरोप लगाया कि उसकी माता सरस्वती देवी की संपत्तियों पर कब्जा करने की नीयत से आरोपितों ने आपराधिक षड्यंत्र रचकर एक कूटरचित वसीयत तैयार की और उसे वास्तविक दस्तावेज के रूप में उपयोग किया।
मामले में नामजद आरोपितों में चक 18 जीजीआर (शेरेकां) निवासी अरुण (19) पुत्र धर्मपाल, धर्मपाल (46) पुत्र सहीराम, वार्ड नम्बर 1, चक 4 केएसपी निवासी विकास पुत्र रामसिंह, सिरसा जिले के बुर्जभंगु निवासी आत्माराम पुत्र राममूर्ति तथा जंक्शन निवासी नोटरी पब्लिक बृजमोहन पुत्र रामनारायण शामिल हैं।
परिवाद के अनुसार सरोज के भाई रामपाल, उनकी पत्नी संतोष, पुत्र रितिक और पुत्री रसिका की 17 सितम्बर 2015 को एक कार दुर्घटना में मृत्यु हो गई थी। इसके बाद अतिरिक्त सिविल जज (वरिष्ठ खंड) सिरसा ने 13 मई 2019 के निर्णय में सरोज की माता सरस्वती देवी को संबंधित संपत्तियों की उत्तराधिकारी घोषित किया था। परिवादिया का आरोप है कि उसकी माता सरस्वती देवी जीवन के अंतिम वर्षों में उसके साथ हनुमानगढ़ में रहती थीं और 7 नवंबर 2024 को उनका निधन हो गया। इसके बाद धर्मपाल ने संपत्ति विवाद को लेकर दीवानी वाद दायर किया, लेकिन बाद में उसे अदम पैरवी में खारिज करवा लिया।
इसी दौरान आरोपितों ने कथित रूप से 20 अक्टूबर 2024 दिनांकित एक फर्जी वसीयत तैयार करवाई और सरस्वती देवी की मृत्यु के बाद 19 जून 2025 को उसका पंजीकरण करवा लिया। परिवाद में कहा गया है कि कथित वसीयत में कई गंभीर विसंगतियां हैं। दस्तावेज पर हस्ताक्षरों की स्थिति, नोटरी प्रक्रिया का अभाव, नोटरी रजिस्टर में प्रविष्टि नहीं होना तथा अन्य परिस्थितियां इस बात की ओर संकेत करती हैं कि दस्तावेज पहले से हस्ताक्षरित खाली कागजों का दुरुपयोग कर तैयार किया गया है।
सरोज ने यह भी आरोप लगाया कि उक्त वसीयत के आधार पर सिरसा स्थित संपत्तियों का इंतकाल करवाने की कार्रवाई शुरू की गई, जिसके बाद उसे दस्तावेज की जानकारी मिली और उसने पुलिस तथा जिला पुलिस अधीक्षक को शिकायतें दीं, लेकिन कार्रवाई नहीं होने पर न्यायालय की शरण ली। न्यायालय से प्राप्त इस्तगासे के अवलोकन के बाद पुलिस ने प्रथम दृष्टया भारतीय न्याय संहिता की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। मामले की जांच उपनिरीक्षक गजेन्द्र शर्मा को सौंपी गई है। पुलिस अब कथित वसीयत की सत्यता, दस्तावेजी साक्ष्यों तथा आरोपितों की भूमिका की जांच करेगी।