शिक्षा और रोजगार
कांग्रेस व सपा मोहम्मद अली जिन्ना के उपासक: योगी
कैराना पहुंचे प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपने संबोधन में विपक्षी दलों पर रहे हमलावर
कैराना (सच कहूँ/संदीप इन्सां)। Kairana News: कैराना पहुंचे प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विपक्षी दलों पर जमकर प्रहार किए। उन्होंने कांग्रेस व समाजवादी पार्टी को पाकिस्तान के जन्मदाता मोहम्मद अली जिन्ना का उपासक और अनुयायी तक कह डाला। मुख्यमंत्री ने जनपद शामली की तीनों विधानसभाओं में प्रस्तावित 581 करोड़ रुपये की 89 विकास योजनाओं के शिलान्यास व लोकार्पण भी किया। इस दौरान विभिन्न योजनाओं के लाभार्थियों को स्वीकृति-पत्र, चाबी, चेक तथा नवनियुक्त आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों को नियुक्ति पत्र भी वितरित किये गए।
शुक्रवार को दोपहर करीब 12:05 बजे प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कैराना के मुख्य पानीपत-खटीमा राजमार्ग पर स्थित विजय सिंह पथिक राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय के मैदान में पहुंचे। जहां पर उन्होंने जनसभा को संबोधित किया। मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन की शुरुआत 'सियावर रामचन्द्र भगवान की जय, पवन सुत हनुमान की जय, भारत माता की जय तथा हर हर महादेव के जयकारों के साथ में की। उन्होंने कहा कि वह जनपद शामली में विकास कार्यों के निरीक्षण, शिलान्यास व लोकार्पण के लिए आये है। कैराना अपनी पौराणिक और ऐतिहासिक परंपरा के लिए जग विख्यात है। पांच हजार वर्ष पूर्व कुरुक्षेत्र के धर्मयुद्ध में जाने से पहले लीलाधारी श्रीकृष्ण ने यहां के श्री हनुमान टीला पर विश्राम किया था और पवित्र जल को ग्रहण किया था। यहीं नहीं, शामली व कैराना की पावन धरा के लोगो ने 1857 के प्रथम स्वतंत्रता समर में ब्रिटिश हुकूमत की चूलें हिलाने का काम किया था। इसी धरा ने भारतीय शास्त्रीय संगीत की परंपरा को एक नई ऊंचाई दी।
किराना घराने के पंडित भीमसेन जोशी ने दुनिया के अंदर भारत की शास्त्रीय संगीत को एक पहचान दी है। ऐसी धरा को वह शीश झुकाकर नमन करते है। मुख्यमंत्री ने कहा कि शामली जनपद की अपनी गन्ने की मिठास है। शामली जिला आज से दस वर्ष पहले लोगो के लिए कौतूहल का विषय बना हुआ था। लोग इस बात को सोचते थे कि शामली जिला कहाँ है। जो इतना दहशत और भय का प्रतीक बना हुआ है। यहां पलायन होता था। सरेआम गुंडागर्दी होती थी। कोई भी सुरक्षित नही था। कैराना व कांधला का पलायन एक शरारत के तहत किया गया था। एक साजिश के तहत यहां की डेमोग्राफी को बदलने षड्यंत्र रचे गए थे। विकास कार्य ठप पड़ा था। नौजवान हताश व निराश था। अन्नदाता किसान आत्महत्या करने के लिए मजबूर था। बहन-बेटियां घर से बाहर निकलने में डरती थी। उद्योग धंधे चौपट हो रहे थे। आवागमन के मार्ग पूरी तरह गड्ढों में तब्दील हो चुके थे।
बिजली नही आती थी। आज जब वह कैराना व शामली को देखते है तो अंतःकरण से खुशी होती है कि जैसे प्रयागराज की धरती गंगा, यमुना और सरस्वती के त्रिवेणी संगम के लिए जानी जाती है। ऐसे ही पश्चिमी उत्तर-प्रदेश में शामली जनपद भी दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेस-वे, शामली-अंबाला एक्सप्रेस-वे और शामली-गोरखपुर एक्सप्रेस-वे से त्रिवेणी का संगम बन चुका है। यहां की युवा पीढ़ी की ऊर्जा का उपयोग यदि सकारात्मक दिशा में किया गया तो आने वाले समय में यहां इंफ्रास्ट्रक्चर और सुरक्षा का बेहतर माहौल शामली को एनसीआर के सबसे समृद्ध और धनी जनपदों में खड़ा करके रख देगा।
