देखें, पूज्य गुरु जी खेत में ट्रैक्टर कैसे चलाते है | MSG

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बरनावा। पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां आज यूटयूब चैनल पर लाइव आकर साध-संगत को दर्शन दिए। पूज्य गुरु जी टैक्टर से खेत को जोता। इससे पहले पूज्य गुरु जी ने आज इंस्टाग्राम पर एक रील डाली थी जिसमें पूज्य गुरु जी एक डॉगी के साथ नजर आ रहे हैं। आपको बता दें कि पूज्य गुरु जी हर रोज आॅनलाइन रूहानी सत्संगों के माध्यम से लोगों का नशा छूड़वा रहे हैं और राम के नाम से जोड़ रहे हैं। आइयें करते हैं पूज्य गुरु जी के दर्शन…

ुइससे पहले पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां ने 14 नवंबर दिन सोमवार को खेती से दूर होती युवा पीढ़ी से आह्वान किया। वे सिर्फ नौकरी के पीछे भागने की बजाय कृषि व्यवसाय को भी तवज्जो दें ताकि देश तरक्की कर सके। पूज्य गुरु जी सायं अपने यूट्यूब चैनल सैंटएमएसजी पर आश्रम के खेत में स्वराज ट्रैक्टर चलाते हुए लाइव हुए। इस दौरान आपजी ने फरमाया कि किसान जहर मुक्त खेती यानि आर्गेनिक खेती को बढ़ावा दें। इसके साथ ही जिनके पास जमीन है, उन युवाओं से खेती को तरजीह देने का आह्वान किया। गौरतलब है कि पूज्य गुरु जी कृषि के विशेषज्ञ हैं और समय-समय पर किसानों को अमूल्य टिप्स, तकनीक और बारीकियों से अवगत करवाते रहते हैं, जिनको अपनाकर किसान भाई भी लाभ उठा रहे हैं।

पूज्य गुरु जी खेतीबाड़ी में बाल्यावस्था में ही जुट गये थे

आपको बता दें कि आप जी के खेतीबाड़ी हुनर के चर्चे आज हर जुबान पर हैं और किसानों ने पूज्य गुरु जी की तकनीक अपनाकर राष्टÑपति अवार्ड तक जीते हैं। विरासत में मिली खेती को आधुनिक रूप देकर इसे घाटे के सौदे से फायदे का सौदा बनाया। एक ही खेत से एक ही समय में 13-13 फसलें लेने के बारे में कोई सोच भी कैसे सकता है पर आप जी ने कारनामा कर दिखाया है। 50 से 55 डिग्री सेल्सियस में सेब, काजू, बादाम की फसलें लेने वाला अजूबा नहीं तो और क्या है। राजस्थान सीमा से सटे सरसा जैसे रेतीले इलाके में आर्गेनिक फसलों के साथ-साथ औषधीय फसलों की पैदावार होना पूज्य गुरु जी की बदौलत ही संभव हो पाया है। दिल्ली स्थित पूसा कृषि विश्वविद्यालय, पंजाब के लुधियाना स्थित पंजाब कृषि विश्वविद्यालय व हरियाणा के हिसार स्थित कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों की टीमें यहां का कई बार दौरा कर चुकी हैं। वहीं गिरते भू-जल स्तर को रोकने के लिए आप जी की तकनीक ने कृषि वैज्ञानिकों को भी हैरत में डाल रखा है। बेहद सस्ती और उपयोगी रि-यूज वॉटर तकनीक द्वारा पहले इस्तेमाल किए हुए पानी से बार-बार फसलों की सिंचाई की जा सकती है। आपको बता दें कि पूज्य गुरु जी खेतीबाड़ी में बाल्यावस्था में जुट गये थे।

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