शिक्षा और रोजगार
Sugar Price Hike: त्योहारी सीजन में चीनी के दाम पर बड़ी राहत की उम्मीद, रिफाइनरियां बेचेंगी 2.5 लाख टन चीनी
त्योहारी सीजन में चीनी के दाम पर बड़ी राहत की उम्मीद, रिफाइनरियां बेचेंगी 2.5 लाख टन चीनी
Sugar Price Hike: त्योहारी सीजन शुरू होते ही चीनी की कीमतों में तेजी ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। अगर चीनी के दाम में बढ़ोतरी जारी रहती है तो इसका असर मिठाइयों की कीमतों पर भी पड़ सकता है। हालांकि, अब सरकार और चीनी रिफाइनरियों की ओर से कीमतों को नियंत्रित करने की कोशिश की जा रही है। श्री रेणुका शुगर्स के एमडी एवं सीईओ सुशील कुमार के अनुसार, भारतीय चीनी रिफाइनरियां घरेलू बाजार में करीब 2.5 लाख टन चीनी बेचने की योजना बना रही हैं। इसका उद्देश्य घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़ाना और बढ़ती कीमतों पर नियंत्रण रखना है। इससे त्योहारी सीजन में उपभोक्ताओं को राहत मिलने की उम्मीद है।
खुदरा बाजार में भी कम हुए चीनी के दाम | Sugar Price Hike
उपभोक्ता मामले मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, चीनी की औसत खुदरा कीमत में हाल के दिनों में कमी दर्ज की गई है। औसत खुदरा भाव 65.08 रुपये प्रति किलो से घटकर 62.57 रुपये प्रति किलो रह गया है। वहीं, थोक बाजार में चीनी के दाम में करीब 17 रुपये प्रति किलो तक की गिरावट देखने को मिली है। एक्स-मिल स्तर पर भी कीमतों में लगभग 17 से 20 रुपये प्रति किलो की कमी आई है।
दुकानों तक नहीं पहुंच रही पूरी गिरावट का फायदा
हालांकि, एक्स-मिल और थोक बाजार में चीनी के दाम में बड़ी गिरावट के बावजूद इसका पूरा फायदा आम उपभोक्ताओं तक नहीं पहुंच रहा है। स्थानीय दुकानों पर खुदरा कीमत में अभी करीब 2 से 3 रुपये प्रति किलो की ही कमी दिखाई दे रही है।
ऐसे में सरकार और रिफाइनरियों की ओर से घरेलू बाजार में अतिरिक्त चीनी उपलब्ध कराने का फैसला महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अगर बाजार में आपूर्ति बढ़ती है तो आने वाले दिनों में खुदरा कीमतों में और कमी देखने को मिल सकती है।
मिठाई कारोबारियों और आम लोगों को राहत की उम्मीद
त्योहारी सीजन में चीनी की मांग सामान्य दिनों के मुकाबले बढ़ जाती है। मिठाई, बेकरी और अन्य खाद्य उत्पादों में चीनी की बड़ी खपत होती है। ऐसे में कीमतों में कमी से मिठाई कारोबारियों के साथ-साथ आम लोगों को भी राहत मिल सकती है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि 2.5 लाख टन चीनी की घरेलू बाजार में बिक्री के बाद खुदरा कीमतों में कितनी कमी आती है।