महाराष्ट्र: डेल्टा वेरिएंट के केस बढ़ने से हड़कंप, 5 की मौत, 66 मरीज मिले

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वैक्सीनेशन के बावजूद भी मौत से बढ़ी चिंताए

मुंबई (एजेंसी)। कोरोना की दूसरी लहर के बाद महाराष्ट्र में अब डेल्टा स्वरूप से संक्रमित 66 केस मिल चुके हैं। वहीं डरावना पहलू ये है कि इनमें से पांच लोगों की जान जा चुकी है। बताया जा रहा है कि इन 66 मरीजों में से कुछ ने तो वैक्सीन की दोनों डोज लगवा ली थी। राज्य के स्वास्थ्य विभाग ने ये जानकारी दी। राज्य से मरीजों के लिए गए नमूनों के जीनोम अनुक्रमण जांच में ये केस सामने आए। बता दें कि मुंबई में कोरोना वायरस के डेल्टा प्लस स्वरूप के संक्रमण से 63 वर्षीय महिला की मौत का पहला केस था।

बृह्न मुंबई महानगर पालिका के एक अधिकारी ने बताया कि मृतक बुजुर्ग महिला को कोविड-रोधी टीके की दोनों खुराकें दी गई थीं। अधिकारियों ने कहा कि महिला के संपर्क में आए दो अन्य लोगों में भी संक्रमण की पुष्टि हुई है। चिंताजनक पहलू ये भी है कि वायरस का यह स्वरूप बेहद संक्रामक है। डेल्टा प्लस स्वरूप के सबसे ज्यादा 13 मामले उत्तरी महाराष्ट्र के जलगांव से आए हैं। वहीं रत्नागिरि से 12 और मुंबई से 11 मामले आ चुके हैं। बाकी मामलों अन्य स्थानों के हैं।

क्या हैं डेल्टा प्लस

डेल्टा वैरिएंट ही वह वजह है जिसके चलते भारत में कोरोना की दूसरी खतरनाक लहर आई थी। कोविड-19 का ये वेरिएंट पहली बार भारत में ही मिला था। इसी से भारत में कोरोना के दौरान सबसे ज्यादा मौतें हुईं हैं। वैज्ञानिकों की मानें तो डेल्टा वेरिएंट का संक्रमण काफी तेजी से फैलता है। साथ ही ऐसे में मरीजों में कोरोना के गंभीर लक्षण दिखते हैं। इस वक्त ब्रिटेन और इजराइल में इसी वेरिएंट के चलते कोरोना के नए केस में तेजी से इजाफा हो रहा है। आंकड़ों के मुताबिक इजराइल में कोरोना के 90 फीसदी केस इसी वेरिएंट के हैं। ये स्थिति तब है जब वहां 50 फीसदी लोगों ने वैक्सीन लगवा ली है। कोरोना का ये एक अन्य वेरिएंट डेल्टा में ही म्यूटेशन के बाद देखने को मिला है।

डेल्टा प्लस वैरिएंट के प्रमुख सिम्पटंस

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  • खांसी, बुखार, जुकाम
  • त्वचा पर चकत्ते पड़ना
  • गले में खराश
  • टेस्ट और स्मेल ना आना
  • दस्त लगना
  • पैर की अंगुलियों का रंग बदलना
  • सीने में दर्द, सिरदर्द
  • सांस लेने में परेशानी

तो इसलिए खतरनाक है डेल्टा प्लस वैरिएंट?

हेल्थ मिनिस्ट्री और डब्ल्यूएचओ ने डेल्टा प्लस को वैरिएंट आॅफ कंसर्न भी घोषित किया है। किसी भी म्यूटेशन को वैरिएंट आॅफ कंसर्न तब कहा जाता है जब उसमें ये बातें सामने आएं।

  • वायरस की संक्रमण क्षमता ज्यादा हो और वो एक व्यक्ति से दूसरे में आसानी से फैल जाए।
  • अगर म्यूटेशन वायरस की एंटीबॉडी की क्षमता को कम कर दे।
  • यह म्यूटेशन उपचार और वैक्सीन के असर को कम करने में भी सक्षम हो।
  • जांच के बाद भी आसानी से पहचान में नहीं आएं।

ऐसे करें कोरोना के डेल्टा प्लस वैरिएंट से बचाव

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  • घर से बाहर निकलते समय डबल मास्क पहनें। अतिआवश्यक काम होने पर घर से बाहर जाएं।
  • हाथों को बार-बार अच्छी तरह साबुन से धोएं और किसी भी चीज को छूने से पहले जरूर सेनेटाइज करें।
  • सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें और कम से कम छह फीट की दूरी बना कर रखें।
  • घर की चीजों और आसपास की जगहों को साफ-सुधरा रखें और डिसइंफेक्ट करते रहें।
  • बाहर से आने वाले सभी सामान को पहले डिसइंफेक्ट करें और फिर घर में लाएं।

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