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जानिये क्यों बढ़ रहे हैं पति-पत्नी के बीच तलाक के मामले | Ram Rahim
बरनावा। पूज्य गुरू संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां वीरवार रात्रि आॅनलाइन गुरूकुल के माध्यम से युवाओं से रूबरू हुए। इस दौरान पूज्य गुरू जी ने युवाओं द्वारा पूछे गए विभिन्न सवालों के जवाब देकर उनकी जिज्ञासा को शांत किया। इसके साथ ही युवाओं को जीवन में आने वाली परेशानियों से मुक्त जीवन जीने के टिप्स भी दिए।

सवाल : गुरू जी आजकल लड़कियां बहुत टैलेंटिड हैं और वो हर फिल्ड में लड़कों के मुकाबले बहुत अच्छा कमा लेती हैं तो क्या तलाक के बढ़ते मामलों के पीछे यही कारण ज्यादा है?
पूज्य गुरू जी जवाब : ये कारण भी हो सकता है, लेकिन हमें जो लगता है तलाक का कारण कि एक-दूसरे पर शादी से पहले बहुत ज्यादा फेथ हो जाता है। एक-दूसरे से बहुत ज्यादा खुल जाते हैं, लेकिन जब वो बंधनों में बंध जाते हैं, तब जाकर असलीयत का सामना होता है। तो उन बंधनों में रहकर जब परिवारों के साथ विचरना पड़ता है तब पता चलता है कि लाइफ क्या है। पहले दोनों पर्सनल लाइफ जीते हैं और जब वो लाइफ परिवार से जुड़ती है तो उस समय काफी चेंजिज आते हैं। वो चीज नहीं रहती कि आप सिर्फ दोनों ही हैं, पूरे परिवार को साथ लेकर चलना पड़ता है, ये भी एक कारण है।
पहले क्या होता था कि जो शादियां होती थी वो इस तरह से की जाती थी कि परिवार वाले चुनते थे और फिर शादियां होती थी। उसमें विचारों का मिलना आसान सा इसलिए हो जाता था कि आप दोनों एक दूसरे के लिए नए हैं। तो नया आदमी झिझकता है हर बात करने के लिए, धीरे-धीरे खुलते-खुलते उसमें काफी टाइम निकल जाता है, उसमें फिर मैच्यूरिटी आ जाती है दोनों रिश्तों में कि भई हाँ, हमें इस तरह से रहना है। लेकिन आप पहले ही मैच्यूरिटी ले आए कि अभी परिवारों से तो मिले ही नहीं, उनके साथ तो विचरे नहीं, तो आपस में मैच्यूरिटी हो गई, लेकिन जब वो परिवार एंटर करते हैं तो चेंजिज आने शुरू हो जाते हैं कि इस समय तो आपने ये बोला था, अब ये बोला है।
वो माँ की बात बोले या ना बोले, बाप का पक्ष ले या ना ले, वो बेचारा सोचता है और आप भी सोचती हैं कि मैं अपने माँ-बाप का पक्ष लूं या ना लूं, और इसी तरह से इसी उलझन में फिर वो ब्रेकअप हो जाते हैं, झगड़े हो जाते हैं। तो हमें लगता है कि ये भी एक कारण है कि पहले कुछ बातें और होती हैं और फिर शादी होने के बाद जब पूरे संबंधों के साथ जीना पड़ता है। तो पहले से ये अंडरस्टेंडिग होनी चाहिए आपके अंदर, एक समझ होनी चाहिए कि भई ये होने वाला है तो फिर हो सकता है कि ये चीज ना हो, जो कि ज्यादा हो रहा है तलाक वगैराह।
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