‘मेरे मक्खन मलाई सतगुरू मेरी बहू भी तू

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मस्ताना जी का अपने सतगुरू प्रति बेअंत प्यार

एक बार पूजनीय बेपरवाह शाह मस्ताना जी महाराज मस्ती में पूजनीय बाबा सावण सिंह जी महाराज के सामने नाच रहे थे। नाचते-नाचते आप जी को पता ही नहीं चला कि आप जी अपने मुर्शिद की प्रशंसा में क्या कह रहे हैं। आप जी कह रहे थे कि ‘‘ हे मेरे मक्खन मलाई सतगुरू! आप मेरी बहन, आप मेरे भाई, आप मेरे पिता, आप मेरी मां, आप मेरी बहू और मेरे सब कुछ’’ व पता नहीं क्या क्या बोल गए। पूज्य बाबा जी आपजी को देखकर हंसे जा रहे थे।

 कुछ लोगों को शिकायत करने का मौका मिल गया। उनमें से किसी एक ने पूज्य बाबा जी के सामने आपजी की शिकायत कर दी कि मस्ताना जी उनको अपनी बहू कह रहा था। भाव आप जी का निरादर कर रहा था। यह सुनकर पूज्य बाबा जी हंसे व फरमाया, ‘‘भाई, वह तो फक्कड़ फकीर है, हम तो उसकी पत्नि ही हैं।’’ शिकायत करने वाले देखता ही रह गया।

हमारे आगे तो एक मस्ताना नाचता है, इनके नाम पर तो दुनिया नाचेगी

एक बार एक सत्संगी ने पूज्य बाबा सावण सिंह महाराज की उपस्थिति में अर्ज की ‘‘बाबा जी, यह बिलोचीस्तानी मस्ताना मुजरा क्यो करते हैं, उस से धूड़ उठती है व साध-संगत का ध्यान भटकता है। पूज्य बाबा जी ने मस्ताना जी को बुलाया व पूछा-बता, भाई मस्ताना शाह! आप मुजरा क्यों करते हो? ’’ इस पर आप जी ने अपने मुर्शिद के सामने पवित्र ग्रन्थों की शिक्षा का जिक्र किया, जिसमें शिष्य गुरू के आगे मस्ती में नाचता है। मस्ताना जी ने कहा, ‘‘आप हमारे गुरू हो, गाईड हो।’’ इस पर बाबा जी बोले, ‘मस्ताना ठीक है’और यह भी वचन फरमाया, ‘‘हमारे आगे तो एक मस्ताना नाचता है इनके नाम पर तो दुनिया नाचेगी।’’

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