बागी चाचा और भाई से नहीं हुई चिराग पासवान की मुलाकात?

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गेट पर 20 मिनट तक करना पड़ा इंतजार, 90 मिनट आवास में रुके

नई दिल्ली (एजेंसी)। लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) के छह लोकसभा सदस्यों में से पांच ने , दल के मुखिया चिराग पासवान को संसद के निचले सदन में पार्टी के नेता के पद से हटाने के लिए हाथ मिला लिया है और उनकी जगह उनके चाचा पशुपति कुमार पारस को इस पद के लिए चुन लिया है। वहीं, पारस ने सोमवार को बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सराहना करते हुए उन्हें एक अच्छा नेता तथा ‘विकास पुरुष’ बताया और इसके साथ ही पार्टी में एक बड़ी दरार उजागर हो गई क्योंकि पारस के भतीजे चिराग पासवान जद (यू) अध्यक्ष के धुर आलोचक रहे हैं। हाजीपुर से सांसद पारस ने कहा, ‘मैंने पार्टी को तोड़ा नहीं, बल्कि बचाया है।

उन्होंने कहा कि लोजपा के 99 प्रतिशत कार्यकर्ता पासवान के नेतृत्व में बिहार 2020 विधानसभा चुनाव में जद (यू) के खिलाफ पार्टी के लड़ने और खराब प्रदर्शन से नाखुश हैं।पारस ने कहा कि उनका गुट भाजपा नीत राजग सरकार का हिस्सा बना रहेगा और पासवान भी संगठन का हिस्सा बने रह सकते हैं। चिराग पासवान के खिलाफ हाथ मिलाने वाले पांच सांसदों के समूह ने पारस को सदन में लोजपा का नेता चुनने के अपने फैसले से लोकसभा अध्यक्ष को अवगत करा दिया है। हालांकि पारस ने इस संदर्भ में कोई टिप्पणी नहीं की।

बिना बात ही चले गए चिराग

पारस के पत्रकारों से बात करने के बाद चिराग पासवान राष्ट्रीय राजधानी स्थित उनके चाचा के आवास पर उनसे मिलने पहुंचे। पासवान के रिश्ते के भाई और सांसद प्रिंस राज भी इसी आवास में रहते हैं। यहां घर के बाहर पहुंचने के बाद करीब 20 मिनट तक गेट नहीं खोला गया। ऐसे में चिराग को इंतजार करना पड़ा। इसके बाद पारस और प्रिंस के आवास पर करीब 90 मिनट तक रुकने के बाद चिराग पासवान वहां से मीडिया से बात किए बिना ही चले गए।

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