कोरोना केवल स्कूलों में नहीं होता

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पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव की तैयारियां जोरों पर जारी हैं। राजनीतिक नेता हजारों की संख्या में वर्करों के साथ प्रचार कर रहे हैं। पंजाब सरकार ने 1000 व्यक्तियों को राजनीतिक गतिविधियों में भाग लेने की छूट दी है बाजवूद इसके पंजाब में स्कूल बंद हैं। चुनाव तो उत्तर प्रदेश जैसे बड़ी जनसंख्या वाले राज्य में भी हो रहे हैं लेकिन वहां स्कूल खुलने का निर्णय हो चुका है। इसी तरह उत्तरखंड में भी चुनाव हो रहे हैं जहां स्कूल खोलने की तैयारी हो रही है। स्कूल बंद होने से बच्चों की शिक्षा प्रभावित हो रही है विशेष तौर पर सरकारी स्कूलों में आॅनलाइन शिक्षा की पूर्ण व्यवस्था नहीं होने के कारण अध्यापक और विद्यार्थी दोनों परेशान हैं। यंू भी महंगे निजी स्कूल आॅनलाइन पढ़ाई की बजाय सीधी पढ़ाई की मांग कर रहे हैं। हैरानी इस बात की है कि आखिर कोरोना पाबंदियां केवल स्कूलों के लिए क्यों हैं, यह भी विडंबना की बात है कि शराब के ठेके तो खुले हैं लेकिन शिक्षा के मंदिर बंद हैं।

वास्तव में सत्तापक्ष पार्टी सहित सभी राजनीतिक पार्टियां इस बात को जानती हैं कि यदि स्कूलों में कोरोना के मामले बढ़ने लगे तो मजबूरन राजनीतिक कार्यक्रमों पर भी पाबंदी लगानी होगी। इसीलिए प्रदेश सरकार किसी न किसी तरह स्कूल बंद रखने का फैसलों को मतदान के दिन (20 फरवरी) तक खींचने का प्रयास कर रही है। सत्ता के लालच के लिए स्कूल बंद करना शिक्षा व्यवस्था के साथ घटिया खिलवाड़ और शिक्षा प्रति बेहद अवैज्ञानिक नजरिया है। होना तो यह चाहिए था कि स्कूल खोलने के लिए विशेषज्ञों की समिति बनाकर उनसे सुझाव लिए जाते। समस्या का समाधान निकालने की बजाय स्कूलों को बंद करना जिम्मेदारी से भागना है। अभिभावक भी बच्चों की शिक्षा खराब होने से बेहद परेशान हैं। पंजाब के मालवा क्षेत्र में अब अभिभावक और कुछ संगठनों द्वारा स्कूल बंद रखने के खिलाफ धरने और सड़क जाम करने की चेतावनी की खबरें सामने आ रही हैं।

यह सरकार की जिम्मेदारी है कि वह शिक्षा के प्रति नकारात्मक रवैया अपनाने की बजाय इसका वैज्ञानिक समाधान निकाले। शिक्षा को फाल्तू का मुद्दा समझने की बुरी नीति त्यागनी होगी। पहले ही विद्यार्थियों का डेढ़ वर्ष के करीब समय बर्बाद हो चुका है। पंजाब सरकार चुनावों में व्यस्त होने के चलते शिक्षा के लिए भी कुछ समय निकाले ताकि स्कूलों में शिक्षा सुचारू तरीके से चलाई जा सके। क्योंकि दिल्ली में स्कूलों को सोमवार से खोला जा रहा है, राजस्थान में भी कुछ ऐसी ही तैयारी हो रही है। पिछले दो वर्ष से स्कूल बंद है इससे बच्चों का बहुत नुक्सान हो चुका है, खासकर तब जब बच्चे ज्यादातर समय वीडियो गेम एवं टीवी पर गुजारने को मजबूर हैं।

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