Punjab Roadways Strike: पंजाब में सरकारी बसों का रहा चक्का जाम, हजारों यात्री परेशान
पंजाब रोडवेज, पनबस और पीआरटीसी के कच्चे कर्मियों की सरकार के साथ बैठक रही बेनतीजा
चंडीगढ़ (सच कहूँ/अश्वनी चावला)। Punjab Roadways Strike: पंजाब रोडवेज, पनबस और पीआरटीसी के कच्चे कर्मचारियों की हड़ताल को लेकर पंजाब सरकार और यूनियन के बीच लगभग डेढ़ घंटे तक चली बैठक बिना किसी नतीजे के समाप्त हो गई। कर्मचारियों को नियमित करने के लिए विधानसभा में विधेयक (बिल) लाने का भरोसा पंजाब के परिवहन मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने दिया, लेकिन यूनियन ने बिल पारित होने तक इंतजार करने से साफ इनकार कर दिया। बातचीत विफल होने के बाद पूरे पंजाब में सरकारी बसों का चक्का जाम कर दिया गया है। इस हड़ताल के कारण यात्रियों की परेशानियाँ बढ़ गई हैं।
पंजाब के कई बस स्टैंडों पर बड़ी संख्या में लोग अपने घरों और कार्यस्थलों तक पहुंचने के लिए बसों का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन उन्हें सरकारी बस सेवा उपलब्ध नहीं हो रही है। आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है, क्योंकि परिवहन विभाग के कच्चे ड्राइवरों और कंडक्टरों ने केवल 24 घंटे की हड़ताल नहीं, बल्कि 5 अगस्त तक आंदोलन जारी रखने का ऐलान किया है। इससे अगले तीन दिनों तक पूरे पंजाब में आम जनता को भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। कच्चे ड्राइवरों और कंडक्टरों की यूनियन के साथ बैठक के बाद परिवहन मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि पंजाब सरकार कच्चे कर्मचारियों को नियमित करने के लिए विधानसभा में विधेयक लेकर आ रही है। उन्होंने कहा कि इस विधेयक के तहत राज्य के कच्चे कर्मचारियों को नियमित करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी, जिसमें परिवहन विभाग के बस चालक और परिचालक भी शामिल होंगे। उन्होंने यूनियन से हड़ताल समाप्त कर कुछ दिन और इंतजार करने की अपील की।
बैठक के दौरान भी उन्होंने यूनियन नेताओं से कुछ समय देने का आग्रह किया। चीमा ने कहा कि इसी मुद्दे को लेकर कर्मचारियों के साथ बैठक की गई थी और बातचीत के दौरान मामला लगभग सहमति की ओर बढ़ गया था। हालांकि, यूनियन द्वारा विधेयक आने तक इंतजार करने से इनकार किए जाने के कारण बैठक किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंच सकी।
कच्चे कर्मचारियों की यूनियन ने सरकार के इस आश्वासन को स्वीकार करने से इनकार कर दिया है। यूनियन अध्यक्ष रेशम सिंह गिल ने कहा कि कर्मचारियों की मांगें लंबे समय से लंबित हैं और अब केवल आश्वासनों से काम नहीं चलेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक कर्मचारियों को नियमित करने संबंधी ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक हड़ताल वापस नहीं ली जाएगी। यूनियन ने अब मोहाली से चंडीगढ़ की ओर कूच करने का भी ऐलान किया है। यूनियन नेताओं के अनुसार कर्मचारी मुख्यमंत्री आवास की ओर मार्च कर अपनी मांगें सरकार के सामने रखेंगे।
2,900 से अधिक सरकारी बसें प्रभावित
पंजाब सरकार के सरकारी बस बेड़े में 2,900 से अधिक बसें शामिल हैं। इनमें लगभग 1,694 बसें पंजाब रोडवेज-पनबस तथा करीब 1,304 बसें पीआरटीसी की हैं। ये बसें पंजाब के अलावा अन्य राज्यों के लिए भी सेवाएँ प्रदान करती हैं। सामान्य दिनों में सरकारी बसें 1,000 से अधिक स्थानीय और अंतरराज्यीय मार्गों पर संचालित होती हैं। अकेले पीआरटीसी द्वारा 577 से अधिक रूटों पर बस सेवा उपलब्ध कराई जाती है। सामान्य दिनों में सरकारी बसें प्रतिदिन औसतन 6.5 लाख किलोमीटर से अधिक की दूरी तय करती हैं।
इन बसों के बंद होने का सबसे अधिक असर आम जनता पर पड़ेगा। अब सरकार द्वारा विधानसभा में लाए जाने वाले विधेयक और कच्चे कर्मचारियों के आंदोलन के बीच टकराव की स्थिति बन गई है। एक ओर सरकार विधेयक के माध्यम से कर्मचारियों को नियमित करने का भरोसा दे रही है, वहीं दूसरी ओर यूनियन तत्काल कार्रवाई की माँग पर अड़ी हुई है। ऐसे में पंजाब में सरकारी बस सेवा कब बहाल होगी, इसे लेकर अभी भी असमंजस की स्थिति बनी हुई है।