Weather Update: धुंध के आगोश में रहा उत्तर भारत, इस दिन से गरज-चमक के साथ बारिश के आसार

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नई दिल्ली/चंडीगढ़/हिसार (सच कहूँ/संदीप सिंहमार)। Weather News: मौसमी हलचल के बीच उत्तर भारत में धुंध में ठंड का प्रकोप लगातार बना हुआ है। यह कहे कि संपूर्ण उत्तर भारत वर्तमान में धुंध के आगोश में लिपटा हुआ है तो भी किसी प्रकार की अतिशयोक्ति नहीं होगी। रविवार को मौसम विभाग की उम्मीद के अनुरूप मौसम में बदलाव दिखाई नहीं दिया। क्योंकि पंजाब के अमृतसर में मैदानी इलाकों में सबसे कम तापमान दर्ज किया गया। यहाँ का न्यूनतम तापमान 1.7 डिग्री सेल्सियस बना रहा। वहीं हरियाणा के सोनीपत में न्यूनतम तापमान 3.1 डिग्री सेल्सियस रहा। भारत मौसम विभाग के बुलेटिन के मुताबिक हरियाणा के हिसार, पंजाब के अमृतसर व दिल्ली के सफदरगंज में धुंध का असर ज्यादा देखने को मिला। Weather Update

इस दौरान अमृतसर,सफदरगंज व उत्तर प्रदेश के बरेली में जीरो विजिबिलिटी बनी रही। जिसके कारण जिसका प्रभाव हवाई रेलवे सड़क यातायात पर पड़ा। भारत मौसम विभाग व स्काईमेट वेदर के मुताबिक एक पश्चिमी विक्षोभ पहले ही ऊंचे पर्वतीय इलाकों को प्रभावित करने के लिए आगे बढ़ चुका है। करीब 12,000 फीट से अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में जल्द ही बारिश और बर्फबारी की शुरूआत होने की संभावना है। इसके साथ ही, निचले पर्वतीय क्षेत्रों, कश्मीर घाटी और तराई इलाकों तक बादल फैल चुके हैं। इसके अलावा राजस्थान के मध्य भागों के ऊपर एक प्रेरित चक्रवाती परिसंचरण भी बना हुआ है। पश्चिमी विक्षोभ और इस चक्रवाती सिस्टम का दोहरा असर मौसम गतिविधियों की तीव्रता और विस्तार को और बढ़ा देगा।मौसम के बदलाव का असर सोमवार से दिखाई देना शुरू हो जाएगा।

फिर 22 जनवरी से उत्तर भारत के पर्वतीय इलाकों में बर्फबारी और मैदानी इलाकों में बारिश का असर देखने को मिलेगा। मौसम गतिविधियों की तीव्रता और क्षेत्रफल धीरे-धीरे बढ़ते जाएंगे। भारत मौसम विभाग के पूवार्नुमान के मुताबिक हरियाणा, पंजाब, राजस्थान व चंडीगढ़ में 22 से 25 तक बारिश की संभावना बनी रहेगी। इस दौरान हरियाणा और पंजाब में कहीं-कहीं मध्यम स्तर की बारिश होने के भी आसार हैं। यह दौर गणतंत्र दिवस के आसपास चरम पर पहुंच सकता है। मौसम गतिविधियाँ 22 जनवरी 2026 से जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में शुरू होंगी और अगले 4झ्र5 दिनों में लगातार फैलती रहेंगी। 24 से 26 के बीच उत्तर भारत के सभी पर्वतीय व मैदानी इलाके बदलते मौसम की चपेट में आ सकते हैं।

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