Labour Code 2026: कांग्रेस का बीजीपी पर वॉर! खड़गे बोले-केंद्र ने बिना सलाह के किये 4 नए लेबर कोड लागू

देश में लागू किए गए नए श्रम कानूनों को लेकर राजनीतिक बहस तेज

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Labour Code 2026: नई दिल्ली। देश में लागू किए गए नए श्रम कानूनों को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि नई श्रम संहिताएं देश के करोड़ों कामगारों के हितों के खिलाफ हैं और इससे श्रमिकों की सुरक्षा तथा अधिकार कमजोर होंगे। खड़गे ने कहा कि केंद्र सरकार ने लंबे समय तक इन कानूनों को लागू करने का समय टालने के बाद अब राजपत्र अधिसूचना जारी कर इन्हें लागू कर दिया है। Mallikarjun Kharge

उनके अनुसार, इन श्रम संहिताओं से निजी कंपनियों को कर्मचारियों की नियुक्ति और सेवा समाप्ति में अधिक छूट मिल जाएगी, जिससे नौकरी की स्थिरता प्रभावित हो सकती है। उन्होंने आरोप लगाया कि इससे स्थायी रोजगार की जगह ठेका आधारित नियुक्तियों को बढ़ावा मिलेगा और श्रमिक संगठनों की भूमिका भी सीमित हो सकती है। कांग्रेस अध्यक्ष ने दावा किया कि इन कानूनों को तैयार करने से पहले श्रमिक संगठनों और विभिन्न पक्षों से पर्याप्त चर्चा नहीं की गई। उन्होंने कहा कि वर्षों से भारतीय श्रम सम्मेलन का आयोजन नहीं होना इस बात का संकेत है कि सरकार श्रमिक हितों पर व्यापक संवाद से बचती रही है।

वेतन संहिता को लेकर उन्होंने कहा कि नई व्यवस्था में वेतन निर्धारण की प्रक्रिया अधिक केंद्रीकृत हो गई है। उनके मुताबिक, न्यूनतम वेतन तय करने के पुराने मानकों को कमजोर किया गया है, जिससे भविष्य में मजदूरों के हित प्रभावित हो सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि मूल वेतन की नई परिभाषा लागू होने से कर्मचारियों के हाथ में मिलने वाले वेतन पर असर पड़ सकता है तथा छोटे और मध्यम उद्योगों पर अनुपालन का अतिरिक्त दबाव बढ़ेगा। खड़गे ने कार्यस्थल सुरक्षा से जुड़ी संहिता पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि सुरक्षा नियमों के उल्लंघन पर कठोर जवाबदेही की बजाय जुर्माने की व्यवस्था अधिक प्रभावी बना दी गई है। Mallikarjun Kharge

उन्होंने विशेष रूप से महिलाओं और संविदा कर्मचारियों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता जताई और कहा कि स्पष्ट तथा अनिवार्य सुरक्षा मानकों की आवश्यकता है। सामाजिक सुरक्षा संहिता पर टिप्पणी करते हुए कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले श्रमिकों के लिए अब भी ठोस सुरक्षा व्यवस्था का अभाव है। उन्होंने गिग वर्कर्स और अस्थायी कर्मचारियों के लिए स्पष्ट बीमा, पेंशन और सहायता ढांचे की मांग की।

खड़गे के अनुसार, केवल पंजीकरण और पहचान पत्र देने से श्रमिकों को वास्तविक सामाजिक सुरक्षा नहीं मिल सकती। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी श्रमिक कल्याण को प्राथमिकता देने के अपने एजेंडे पर कायम है। पार्टी ने मनरेगा के दायरे को शहरी क्षेत्रों तक बढ़ाने, न्यूनतम मजदूरी बढ़ाने, सार्वभौमिक स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने और असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए व्यापक सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने की बात दोहराई। Mallikarjun Kharge

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