Snake News: कंकरीट साम्राज्य में सांपों को आसरा नहीं मिला तो किया बस्ती का रुख

नागपंचमी से पहले ठाणे में सांपों के घटते आवास पर चिंता, पर्यावरणविदों ने संरक्षण की अपील की

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मुंबई ( हि.स.)। नागपंचमी के पर्व पर जहां देशभर में लोग नागों की पूजा कर आस्था प्रकट करते हैं, वहीं महाराष्ट्र के ठाणे में सांपों के तेजी से बदलते प्राकृतिक आवास को लेकर पर्यावरणविदों ने चिंता जताई है। शहर में बढ़ते निर्माण, सिमटती हरित भूमि और प्राकृतिक क्षेत्रों के लगातार कम होने से सांपों समेत कई जीव-जंतुओं के सामने अस्तित्व का संकट बढ़ रहा है। Snake News

पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार, ठाणे में कभी झाड़ियों, घास के मैदानों, झीलों, नदियों और नम मिट्टी वाले क्षेत्रों में धामन, नाग, घोणस समेत कई प्रजातियों के सांप आसानी से देखे जाते थे। लेकिन शहरी विस्तार के साथ इन प्राकृतिक स्थानों का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। शहर में नई इमारतों, सड़कों और पार्किंग क्षेत्रों के विस्तार के कारण मिट्टी और वनस्पतियों वाले स्थान लगातार कम हो रहे हैं। इससे केवल सांपों के रहने और छिपने के स्थान प्रभावित नहीं हो रहे, बल्कि उनके भोजन का आधार बनने वाले छोटे जीवों के प्राकृतिक आवास पर भी असर पड़ रहा है।

पर्यावरणविद डॉ. प्रशांत रविंद्र सिंकर के अनुसार, सांपों की संख्या में बदलाव शहरी पारिस्थितिकी तंत्र में हो रहे परिवर्तन का संकेत हो सकता है। उनके अनुसार, शहर के विकास के साथ घास के मैदान, झाड़ियों की पट्टियां, प्राकृतिक मिट्टी, झीलें और स्थानीय वनस्पतियों वाले क्षेत्रों को संरक्षित करना जरूरी है। Snake News

प्राकृतिक स्थान खत्म होने पर बस्तियों की ओर आते हैं सांप

विशेषज्ञों का कहना है कि जब सांपों के प्राकृतिक आश्रय और भोजन के स्रोत कम होते हैं, तो वे सुरक्षित स्थान की तलाश में मानव बस्तियों के आसपास पहुंच सकते हैं। इससे इंसानों और सांपों के बीच टकराव की आशंका भी बढ़ जाती है। ठाणे में खाड़ियां, झीलें, पहाड़ी क्षेत्र, हरित क्षेत्र और संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान जैसे महत्वपूर्ण प्राकृतिक संसाधन मौजूद हैं। पर्यावरणविदों के मुताबिक, इन क्षेत्रों को एक-दूसरे से जोड़ने वाले प्राकृतिक गलियारों को बचाए रखना जैव विविधता के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

सांप केवल जंगल या ग्रामीण क्षेत्रों का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि वे पारिस्थितिकी तंत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कई प्रजातियां चूहों, मेंढकों और छिपकलियों जैसे जीवों की संख्या को नियंत्रित करने में मदद करती हैं। इस तरह वे खाद्य श्रृंखला का संतुलन बनाए रखने में योगदान देते हैं। इसलिए किसी क्षेत्र से सांपों का पूरी तरह गायब होना केवल एक प्रजाति का नुकसान नहीं, बल्कि पूरे स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र में बदलाव का संकेत हो सकता है। Snake News

नागपंचमी पर सांपों को परेशान न करने की अपील

नागपंचमी के अवसर पर विशेषज्ञों ने लोगों से सांपों को पकड़कर कैद में रखने, उनके साथ प्रदर्शन करने या उन्हें जबरन दूध पिलाने जैसी गतिविधियों से बचने की अपील की है। उनका कहना है कि धार्मिक आस्था का सम्मान करते हुए भी वन्यजीवों को नुकसान नहीं पहुंचाया जाना चाहिए। यदि घर या आसपास सांप दिखाई दे, तो उसे पकड़ने या मारने की कोशिश करने के बजाय सुरक्षित दूरी बनाए रखना चाहिए और प्रशिक्षित वन्यजीव बचाव दल या अधिकृत विशेषज्ञ की सहायता लेनी चाहिए।

पर्यावरणविदों के अनुसार, नागपंचमी पर सांपों की पूजा करने से आगे बढ़कर उनके प्राकृतिक आवास को बचाना अधिक महत्वपूर्ण है। शहर की विकास योजनाओं में हरित क्षेत्र, झाड़ियां, प्राकृतिक जलस्रोत, घास के मैदान और स्थानीय वनस्पतियों के संरक्षण को प्राथमिकता देकर मानव और वन्यजीवों के बीच संतुलन कायम किया जा सकता है। Snake News

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