GST Scam Case: गुरुग्राम में 190 करोड़ रुपए के जीएसटी घोटाले का आरोपी बरी
जीएसटी विभाग नहीं दे पाया ठोस गवाह व सुबूत
गुरुग्राम, सच कहूँ/संजय कुमार मेहरा। Gurugram News: यहां 190 करोड़ रुपए के कथित जीएसटी इनपुट टैक्स क्रेडिट घोटाले के मुख्य आरोपी मोहम्मद शमशाद सैफी को अदालत ने सभी आरोपों से मुक्त करते हुए बरी कर दिया है। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी मनीष कुमार की अदालत की ओर से कहा गया कि जीएसटी इंटेलिजेंस विभाग आरोपी के खिलाफ कोई ठोस सबूत और गवाह पेश नहीं कर सका। अदालत ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि केवल विभाग के दावों या गिरफ्तारी के आधार पर किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। यह मामला जीएसटी खुफिया मुख्यालय (डीजीजीआई) की गुरुग्राम जोनल यूनिट ने दर्ज कराया था। विभाग का आरोप था कि दिल्ली के लक्ष्मी नगर निवासी शमशाद सैफी फर्जी कंपनियां बनाने वाले सिंडिकेट में शामिल था।
मैसर्स टेक्नो इलेक्ट्रिकल एंड सेल्स और मैसर्स लता सेल्स जैसी फर्जी फर्म बनाकर बिना माल की सप्लाई के ही फर्जी बिल जारी किए गए और 190 करोड़ रुपए का आईटीसी अवैध रूप से ट्रांसफर कर सरकार को चूना लगाया गया। आरोपी को नौ अक्तूबर 2020 को गिरफ्तार किया गया था। अदालत में विभाग ने छह गवाहों की सूची दी थी। केवल एक सीनियर इंटेलिजेंस आॅफिसर रामाशीष शर्मा अदालत में पेश हो सके। बाकी के पांच गवाह कभी कोर्ट आए ही नहीं। रामाशीष शर्मा ने भी क्रॉस एग्जामिनेशन में माना कि उन्हें फर्जी राशि की सटीक जानकारी नहीं है। वह किसी भी छापेमारी या तलाशी टीम का हिस्सा नहीं थे। करोड़ों के घोटाले में विभाग कोई पंचनामा, बैंक स्टेटमेंट, जीएसटी रिटर्न या इनवॉइस की कॉपी तक कोर्ट में साबित नहीं कर सका। सिर्फ शिकायत का अथॉराइजेशन लेटर पेश किया गया।
अदालत के मुताबिक 29 मई 2023 से 13 अक्तूबर 2025 के बीच विभाग को सबूत पेश करने के लिए 20 से ज्यादा तारीखें दी गईं, फिर भी वह सबूत पूरे नहीं कर सका। इसके चलते अक्तूबर 2025 में गवाही का मौका बंद कर दिया गया था। अंतिम बहस के दौरान 12, 16 और 17 अक्तूबर 2026 को भी विभाग का कोई वकील कोर्ट में मौजूद नहीं रहा। जज ने कहा कि एकमात्र गवाही अधूरी और सुनी-सुनाई बातों पर आधारित है। बिना ठोस सबूत के आरोप तय नहीं हो सकते। इसके बाद कोर्ट ने शमशाद सैफी को बरी करते हुए उनके बेल बॉन्ड भी रद्द कर दिए।