सतगुरु के चरणों में ओड़ निभा गए जीएसएम मोहन लाल इन्सां
GSM भाई मोहन लाल इन्सां अपनी स्वांसों रूपी पूंजी पूर्ण कर कुल मालिक के चरणों में ओड़ निभा गए।
सरसा (सच कहूँ न्यूज)। Mohan Lal Ji Demise News: डेरा सच्चा सौदा प्रबंधकीय समिति के सदस्य जीएसएम भाई मोहन लाल इन्सां (83) वीरवार सायं अपनी स्वांसों रूपी पूंजी पूर्ण कर कुल मालिक के चरणों में ओड़ निभा गए। वे पिछले कुछ दिनों से अस्वस्थ चल रहे थे। डेरा सच्चा सौदा मैनेजमेंट कमेटी सदस्यों, विभिन्न राज्यों के सच्चे नम्र सेवादार, पारिवारिक सदस्यों और रिश्तेदारों सहित साध-संगत ने सचखंडवासी जीएसएम मोहन लाल इन्सां के अंतिम संस्कार के दौरान उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
भाई मोहन लाल इन्सां का जन्म अगस्त 1943 में आदरणीय पिता बचित्र सिंह और आदरणीय माता संत कौर के घर गाँव हुसनर, जिला श्री मुक्तसर साहिब (पंजाब) में हुआ। उनके भाई सचखंडवासी मेजर सिंह साहब भी जीएसएम के तौर पर सेवा निभा चुके हैं। वहीं उनके भाई बलबीर सिंह इन्सां और उनका बेटा खुशप्रीत सिंह इन्सां भी सेवा में आगे रहते हैं। उनकी दो बहनें बलबीर कौर और जसवीर कौर हैं। बचपन से ही मोहन लाल जी इन्सां में प्रभु भक्ति के प्रति गहरी लगन थी। अपनी युवावस्था में भी वे जरूरतमंदों की मदद के लिए हमेशा आगे रहते थे। वे बहुत ही मेहनती और सफल किसान होने के साथ-साथ मिलनसार स्वभाव के धनी थे। सन् 1976 में मोहन लाल इन्सां का परिवार गाँव हुसनर (पंजाब) से 22 एमडी, जिला श्रीगंगानगर (राजस्थान) शिफ्ट हो गया। उन्होंने 11वीं तक पढ़ाई की थी।
सन् 1969 में उन्होंने पूजनीय परम पिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज से नाम की अनमोल दात प्राप्त की। उनकी शादी श्रीमति सुजान कौर के साथ हुई। उनका पूरा परिवार डेरा सच्चा सौदा के साथ जुड़ा है और मानवता भलाई कार्यों में हमेशा आगे रहता है। सन् 1971 में मोहन लाल इन्सां डेरा सच्चा सौदा दरबार में आ गए और मानवता भलाई कार्यों में जुटे रहते। सन् 1977 में सच्चे दाता रहबर पूजनीय परमपिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज की पावन प्रेरणा से मोहन लाल जी इन्सां ने बतौर जीएसएम सेवादार सेवा शुरू की। इसके साथ ही उन्होंने अपना पूरा जीवन इन्सानियत के भले के लिए समर्पित
कर दिया। वे डेरा सच्चा सौदा प्रबंधकीय समिति के सदस्य थे। जब भी किसी को मदद की दरकार होती तो वे तुरंत उसकी मदद करते। आसपास के गाँवों के पंच-सरपंचों और मौजिज लोगों से भी उनका अपार स्नेह और प्रेमभाव था। उन्होंने अपना पूरा जीवन सादगीपूर्ण ढंग से गुजारा। जीएसएम मोहन लाल इन्सां ने पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां पर दृढ़ आस्था और विश्वास के साथ सतगुरु से असीम खुशियों को प्राप्त किया। दरबार की ओर से उन्हें जो भी सेवा मिली, उन्होंने पूरी तन्मयता और ईमानदारी से उसे निभाया।
परमपिता परमात्मा अपने भक्तों को उनके संसार से जाने का आभास भी करवा देता है। भाई मोहन लाल इन्सां ने चार-पाँच दिन पहले ही बता दिया था कि वो अब सचखंड जाने वाले हैं। उन्होंने बताया कि पूज्य गुरु जी ने उन्हें सपने में दर्शन देकर ऐसा ही इशारा किया है। आखिर परमपिता परमात्मा के हुक्मानुसार जीएसएम मोहन लाल इन्सां 21 मई शाम को सचखंड जा विराजे। भाई मोहन लाल इन्सां बेशक आज हमारे बीच नहीं हैं पर उनकी सेवाएं सदा हमारे लिए प्रेरणास्रोत बनी रहेंगी।
चल दिए ओड़ निभा के सतगुरु के प्यारे, दोनों जहां की खुशियों के लूट के नज़ारे...।
