Accident: गुरुग्राम: केएमपी पर चलते हुए आग का गोला बनीं बस, 8 लोग जिंदा जले, मथुरा, वृंदावन से दर्शन करके वापस घर लौट रहे थे

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Accident: नूंह/गुरुग्राम, संजय कुमार मेहरा। शनिवार की आधी रात के बाद श्रद्धालुओं से भरी बस में अज्ञात कारणों से लगी आग में आठ लोग जिंदा जल गए। इस हादसे में दो दर्जन से अधिक लोग बुरी तरह से झुलस गए। घटना की सूचना के साथ ही प्रशासन ने नूंह से लेकर गुरुग्राम तक सरकारी अस्पतालों को अलर्ट कर दिया गया। घायलों को अलग-अलग अस्पताल में भर्ती कराया गया है। दमकल विभाग के कर्मचारी, अन्य अधिकारी, कर्मचारी मौके पर डटे रहे। Gurugram

जानकारी के अनुसार नूंह के उपमंडल तावड़ू क्षेत्र में केएमपी एक्सप्रेस पर शनिवार की अलसुबह श्रद्धालुओं से भरी एक बस गुजर रही थी। बस में चंडीगढ़, पंजाब के लोग मथुरा व वृंदावन से दर्शन करके अपने घर लौट रहे थे। शुक्रवार-शनिवार रात करीब डेढ़ बजे जैसे ही उनकी बस तावड़ू क्षेत्र में पहुंची तो बस से आग की लपटें निकलने लगी। देखते ही देखते आग बस में फैलती चली गई। आनन-फानन में बस को रोककर यात्रियों को उतारना शुरू किया गया। तब तक काफी यात्री आग की चपेट में आ चुकी थे। आग की चपेट में आग 8 लोगों की तो मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। करीब दो दर्जन आग से झुलस गए, जिन्हें आसपास के अस्पतालों में भर्ती कराया गया। आग की सूचना पाकर दमकल विभाग, आपदा प्रबंधन विभाग व प्रशासनिक अमला भी मौके पर पहुंचा। Gurugram

बस में सवार श्रद्धालु सरोज पुंज और पूनम ने के मुताबिक वे एक टूरिस्ट बस को किराए पर करके लाए थे। सभी बनारस और मथुरा, वृंदावन में दर्शनों के लिए गए थे। बस में करीब 60 लोग थे, जिनमें बच्चे, महिलाएं भी शामिल थीं। सभी आपस में रिश्तेदार ही थे। पंजाब के लुधियाना, होशियार, चंडीगढ़ से इकट्ठे होकर यात्रा करके आए थे। अब वापस अपने घर जा रहे थे। इसी बीच यहां हादसा हो गया।

इस दौरान आसपास के लोग साबिर, नसीम, साजिद, एहसान ने बाहर से बस में आग लगी देखी तो ड्राइवर को बस रोकने के लिए कहा। ड्राइवर को कुछ सुनाई नहीं दिया। फिर एक युवक बाइक लेकर बस से आग निकला और बस को रुकवाया। बस रुकते ही हाहाकार मच गया। आग बस के भीतर तक पहुंच चुकी थी। चीख-पुकार के बीच 8 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई।

बहुत ही दुखद घटना हुई है। जिनका निधन हो गया, उन्हें श्रद्धांजलि देते हैं। सभी घायलों का उपचार कराया जा रहा है। आसपास के ग्रामीणों ने अपने स्तर पर बचाव का काम किया। सरकारी मदद नहीं पहुंच पाई, यह भी दुखद है।

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