नृत्य और गीतों से दिखाई हरियाणवी संस्कृति की झलक | Online Gurukul
रोहतक के आईटीआटी मैदान में उमड़ी साध-संगत
पूज्य गुरू जी ने नशा व माँसाहार का त्याग कर मानव सेवा को जीवन समर्पित करने का किया आह्वान
रोहतक (सच कहूँ/नवीन मलिक)। पूज्य गुरू संत डॉ. गुरमीत राम रहीम जी इन्सां ने आॅनलाइन गुरूकुल के माध्यम से रूहानी सत्संग में अमृतमयी वचनों की वर्षा की और साध-संगत को गुरूमंत्र देकर अपना आशीर्वाद दिया। साथ ही नशा व माँसाहार का त्याग कर शुद्ध भावना के साथ मानव सेवा को जीवन समर्पित करने का आह्वान किया। पूज्य गुरू संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां के अमृतमयी वचनों को सुनकर भारी संख्या में उमड़ी साध-संगत में खुशी की लहर दौड़ गई और साध-संगत भव्य पंडाल में झूमकर नाची। पुरानी आईटीआई मैदान में आयोजित रूहानी सत्संग में इतनी संख्या में साध-संगत पहुंची, जिसके चलते पंडाल छोटा पड़ गया। शहर के कई गणमान्य व्यक्तियों ने रूहानी सत्संग में शिरकत की और पूज्य गुरू जी द्वारा किए जा रहे मानवता भलाई के कार्यों की जमकर सराहना की।
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रूहानी सत्संग के दौरान हरियाणवीं संस्कृति के अनुसार आटा पीसती, गेहूं साफ करती, चुुल्हे पर खाना आदि बनाती साध-संगत
इस दौरान हरियाणवी संस्कृति को दर्शाते हुए झांकियां भी आकर्षण का केन्द्र रही। बुधवार सुबह ही साध-संगत कार्यक्रम में आनी शुरू हो गई। साध-संगत ने पूरे अनुशासन का परिचय दिया। दोपहर करीब एक बजे पूज्य गुरू संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां आॅनलाइन गुरूकुल के माध्यम से जुड़े और इस दौरान साध-संगत के ‘‘धन-धन सतगुरू तेरा ही आसरा’’ नारों से पूरा पंडाल गूंज उठा।

हरियाणवी संस्कृति की छठा बिखेरते हुए कुएं से पानी भरते महिलाएं
पूज्य गुरू जी ने साध-संगत की सुख समृद्धि के लिए प्रार्थना की और गुरूमंत्र दिया। रूहानी सत्संग में गुरूजी ने नशा व मांसाहार का त्याग कर सादगीपूर्वक जीवन जीने के लिए प्रेरित किया। साथ ही उन्होंने शुद्ध भावना के साथ सच्चे दाता का नाम जपकर खुशियां पाने के लिए मार्गदर्शन किया। आनलाइन गुरूकुल में पूज्य गुरू जी ने साध-संगत द्वारा पूछे गए प्रश्नों के जवाब देकर उनकी जिज्ञासा को शांत किया।

रूहानी सत्संग के दौरान हरियाणवी झांकी में गाय से दूध दुहती महिला

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