हॉर्मूज मार्ग में बाधा से हरियाणा का चावल निर्यात प्रभावित, बाजार में चिंता का माहौल

25 दिन से बंदरगाहों और समुद्र में अटका बासमती, अध्यक्ष बोले-नया सीजन नजदीक, पेमेंट अटकी तो किसानों-व्यापारियों दोनों पर पड़ेगा असर

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घरौंडा/करनाल (सच कहूँ न्यूज़)। ऑल इंडिया राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष और बोर्ड ऑफ ट्रेड के गैर-सरकारी सदस्य सतीश गोयल ने कहा कि हॉर्मूज स्ट्रेट बंद होने से करीब एक लाख टन बासमती चावल बंदरगाहों पर रुका हुआ है, जो आगे नहीं बढ़ पा रहा। उन्होंने बताया कि लंबे समय तक यही हाल रहा तो बारिश के मौसम में यह माल खराब होने का खतरा भी पैदा हो सकता है। इस मुद्दे को लेकर केंद्र सरकार से बातचीत की गई है और निर्यात को सुचारु करने का आश्वासन मिला है।

सतीश गोयल के अनुसार, हरियाणा के निर्यातकों का करीब एक से डेढ़ लाख टन चावल बंदरगाहों और समुद्र में फंसा हुआ है, जिसकी कीमत 1000 करोड़ रुपये से अधिक है। कुछ माल कांडला पोर्ट पर पड़ा है, जबकि कुछ जहाजों में बीच समुद्र में ही रुका हुआ है। पिछले 25 दिनों से यह स्थिति बनी हुई है। इसका सबसे बड़ा नुकसान व्यापारियों को हो रहा है, क्योंकि बैंक ब्याज लगातार बढ़ रहा है और ट्रांसपोर्टेशन लागत भी बढ़ गई है। इसके साथ ही बंदरगाहों पर डेमरेज चार्ज का दबाव अलग से बढ़ रहा है।

बारिश के मौसम में खुले या लंबे समय तक स्टोरेज में पड़ा चावल खराब होने की आशंका बढ़ जाती है। यदि जल्दी रास्ता नहीं खुला तो गुणवत्ता पर असर पड़ेगा और नुकसान और बढ़ जाएगा। यही वजह है कि व्यापारियों ने सरकार से वित्तीय राहत या अनुदान देने की मांग उठाई है। स्थिति को और गंभीर इस बात ने बना दिया है कि दो से तीन महीने बाद नया धान सीजन शुरू होने वाला है। अगर मौजूदा माल समय पर विदेश नहीं पहुंचा और उसकी पेमेंट नहीं आई, तो व्यापारियों के पास नई फसल खरीदने के लिए पूंजी नहीं होगी। इससे किसानों की फसल की खरीद प्रभावित हो सकती है। सतीश गोयल ने बताया कि जो चावल इस समय सेलरों में तैयार हो रहा है, उस पर हर महीने करीब 1 प्रतिशत की दर से ब्याज लग रहा है। निर्यात में देरी होने से यह लागत लगातार बढ़ रही है।

मिडिल ईस्ट बाजार पर सबसे ज्यादा असर

भारत का बड़ा हिस्सा बासमती चावल का निर्यात मिडिल ईस्ट देशों में होता है। ईरान, इराक और सऊदी अरब जैसे देशों को हर साल करीब 30 लाख टन चावल भेजा जाता है, जिसमें प्रत्येक देश को लगभग 10-10 लाख टन हिस्सा मिलता है।

मौजूदा तनाव के कारण इस पूरे क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ गई है, जिससे व्यापार प्रभावित हुआ है। जहाजों की आवाजाही पर असर पड़ने से शिपिंग चार्ज बढ़ गए हैं, वहीं जोखिम बढ़ने के कारण बीमा प्रीमियम भी महंगा हो गया है।

सरकार के सामने रखी गई मांगें

निर्यातकों ने केंद्र सरकार के सामने कई प्रमुख मांगें रखी हैं। इनमें ट्रांसपोर्टेशन की समस्याओं का समाधान, बढ़े हुए रेट और ब्याज पर राहत, बंदरगाहों पर लगने वाले डेमरेज चार्ज को माफ करना और फंसे माल पर ‘वार कवर’ यानी बीमा सुरक्षा देना शामिल है।

सतीश गोयल ने बताया कि सरकार इन मांगों पर गंभीरता से विचार कर रही है और अगले सप्ताह फिर बैठक कर स्थिति की समीक्षा करेगी।

1 अप्रैल 2025 से 31 मार्च 2026 तक भारत ने 65 लाख टन चावल का निर्यात किया था, जो एक रिकॉर्ड रहा। इस बार लक्ष्य 70 लाख टन तक पहुंचाने का रखा गया है, लेकिन मौजूदा हालात इस लक्ष्य के सामने बड़ी चुनौती बनकर खड़े हैं।

आने वाले हफ्ते तय करेंगे दिशा

फिलहाल पूरा चावल उद्योग अंतरराष्ट्रीय हालात और सरकार के फैसलों पर नजर टिकाए हुए है। यदि जल्द हॉर्मूज स्ट्रेट का रास्ता खुलता है तो निर्यात में तेजी लौट सकती है, लेकिन देरी होने पर इसका असर व्यापारियों से लेकर किसानों और विदेशी मुद्रा आय तक दिखाई देगा। आने वाले कुछ सप्ताह इस उद्योग के लिए बेहद निर्णायक माने जा रहे हैं।

Gharaunda News

 

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