Jantar Mantar Protest: जंतर-मंतर पर छात्रों पर लाठीचार्ज के विरोध में सड़कों पर उतरे अधिवक्ता
अधिवक्ताओं ने भिवानी में प्रदर्शन कर राष्ट्रपति के नाम सौंपा ज्ञापन, नि:शुल्क कानूनी मदद का ऐलान
भिवानी (सच कहूँ/इंद्रवेश)। Bhiwani News: दिल्ली के जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण ढंग से अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे विद्यार्थियों पर हुए पुलिस लाठीचार्ज और छात्राओं के साथ कथित अभद्र व्यवहार के विरोध में अब देश का कानून-पेशेवर वर्ग भी सडकों पर उतर आया है। भिवानी में अधिवक्ताओं ने एकजुट होकर कड़ा विरोध प्रदर्शन किया और सीटीएम राष्ट्रपति के नाम एक ज्ञापन सौंपकर केंद्र सरकार के खिलाफ अपना रोष प्रकट किया। अधिवक्ताओं ने एक स्वर में दिल्ली घटना की कड़ी निंदा करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग की।
इसके साथ ही अधिवक्ताओं ने देश में बार-बार हो रहे पेपर लीक पर पूर्ण रूप से अंकुश लगाने और इस रैकेट में संलिप्त सभी आरोपियों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई करने की मांग उठाई। इस अवसर पर अधिवक्ता रत्न लाल श्योराण, अधिवक्ता देवेंद्र सोढ़ी, पूर्व प्रधान अधिवक्ता प्रदीप बजाड़, पूर्व प्रधान अधिवक्ता सत्यजीत पिलानिया, अधिवक्ता दीपेश सारसर, अधिवक्ता मल्लिका श्योराण, अधिवक्ता ज्योति भारद्वाज, अधिवक्ता प्रिया लेघां सहित अन्य अधिवक्ताओं ने संबोधित किया।
छात्रों पर हुआ अत्याचार बेहद दुखद: अधिवक्ता
इस मौके पर अधिवक्ताओं ने कहा कि दिल्ली में छात्रों पर हुआ अत्याचार बेहद दुखद है। अब सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ताओं से लेकर देशभर की जिला अदालतों के वकील छात्रों के समर्थन में आ चुके हैं। वे सरकार को स्पष्ट चेतावनी देते हैं कि देश के युवा और विद्यार्थी खुद को अकेला न समझें। उनके हक और स्वर्णिम भविष्य की इस लड़ाई में अधिवक्ता कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं। यदि विद्यार्थियों को कानूनी लड़ाई लडनी पड़ी, तो देश का वकील समुदाय उन्हें पूरी तरह से नि:शुल्क कानूनी सहायता प्रदान करेगा।
अधिवक्ताओं ने यह भी साफ किया कि यह विरोध प्रदर्शन किसी राजनीतिक दल के समर्थन या विरोध में नहीं है, बल्कि देश के भविष्य यानी युवाओं के अधिकारों की रक्षा के लिए है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार ने जल्द ही विद्यार्थियों की न्यायसंगत मांगों को नहीं माना, तो देशभर के अधिवक्ता खुद दिल्ली के जंतर-मंतर पहुंचकर आंदोलन को और तेज करेंगे। प्रदर्शन के दौरान अधिवक्ता प्रिया लेघां ने कहा कि प्रदर्शन के दौरान बेटियों और छात्राओं के साथ अभद्र व्यवहार किया गया, यहां तक कि उनके कपड़े तक फाड़ दिए गए। यह न केवल शर्मनाक और निंदनीय है, बल्कि लोकतंत्र की सीधे तौर पर हत्या है।
उन्होंने कहा कि कई वर्षों के इंतजार के बाद आयोजित होने वाले पेपरों का लीक होना युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। जब छात्र इस अन्याय के खिलाफ आवाज उठाते हैं, तो उन पर लाठियां बरसाई जाती हैं। उन्होंने मांग की कि प्रधानमंत्री, केंद्रीय गृह मंत्री भी अपने पद से इस्तीफा दें। देश भर में सरकारी भर्तियों में पेपर लीक पर पूरी तरह रोक लगाने के लिए कड़ा कानून बने और दोषियों को जेल भेजा जाए। प्रभावित छात्रों की मांगों को तुरंत प्रभाव से मानकर उन्हें न्याय दिया जाए।
युवाओं पर हुए लाठीचार्ज के विरोध में भिवानी में शांतिपूर्ण प्रदर्शन
पीपल आॅफ भिवानी के बैनर तले शुक्रवार को भिवानी के हुडा पार्क में बड़ी संख्या में युवाओं, विद्यार्थियों एवं जागरूक नागरिकों ने एकत्र होकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे युवाओं पर हुए लाठीचार्ज एवं दमनात्मक कार्रवाई के विरोध में शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के उपरांत सभी प्रतिभागियों ने जिला उपायुक्त कार्यालय पहुँचकर अपना विरोध दर्ज कराया तथा शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही सुनिश्चित करने की माँग उठाई। इस अवसर पर प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया कि पीपल आॅफ भिवानी किसी भी राजनीतिक दल या राजनीतिक एजेंडे से जुड़ा संगठन नहीं है। यह भिवानी के उन युवाओं की एक पहल है, जो इस मुद्दे पर चल रहे विभिन्न राजनीतिक संगठनों के विरोध प्रदर्शनों का हिस्सा नहीं बनना चाहते।
इस पहल का उद्देश्य शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही, निष्पक्ष परीक्षाएँ तथा युवाओं के भविष्य की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे जलवायु कार्यकर्ता लोकेश तथा विशाल सैनी ने कहा कि लोकतांत्रिक देश में शांतिपूर्ण एवं संवैधानिक तरीके से अपनी बात रखना प्रत्येक नागरिक का अधिकार है। यदि अपने भविष्य और शिक्षा व्यवस्था को लेकर शांतिपूर्ण ढंग से आवाज उठा रहे युवाओं के साथ बल प्रयोग किया जाता है, तो यह लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत है। उन्होंने कहा कि देशभर में लगातार सामने आ रहे पेपर लीक और परीक्षा अनियमितताओं के मामलों ने लाखों विद्यार्थियों का विश्वास कमजोर किया है। ऐसे समय में सरकार की प्राथमिकता युवाओं की बात सुनना और शिक्षा व्यवस्था में आवश्यक सुधार करना होना चाहिए, न कि उनकी आवाज को दबाना।